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भारत की विदेश नीति स्पष्ट, अमेरिका से दोस्ती चाहता है पर हितों से समझौता नहीं: वीणा सीकरी

 

नई द‍िल्‍ली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी म‍िडटर्म इलेक्‍शन के पर‍िणाम और भारत पर उनके प्रभावों पर बात करते हुए पूर्व राजनयिक वीणा सीकरी ने कहा क‍ि भारत व्यापार में भेदभावपूर्ण टैरिफ के खिलाफ है। भारत इन नतीजों के बाद अमेरिका में हो रहे बदलावों पर करीबी नजर रखेगा। साथ ही, राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता किए बिना संतुलित विदेश नीति पर कायम रहेगा।

आईएएनएस के साथ व‍िशेष बातचीत में पूर्व राजनयिक वीणा सीकरी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत लंबे समय से चल रही है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि व्यापार में किसी भी तरह के भेदभावपूर्ण टैरिफ (शुल्क) नहीं होने चाहिए। इसलिए भारत अमेरिका में हो रहे राजनीतिक और आर्थिक बदलावों पर करीबी नजर बनाए रखेगा।

उन्‍होंने कहा क‍ि जहां तक अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का सवाल है, भारत शुरू से ही रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने और ईरान से जुड़े युद्ध को खत्म करने के पक्ष में रहा है। भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की वकालत करता आया है और आगे भी इसी दिशा में प्रयास करता रहेगा।

वीणा सीकरी ने कहा कि भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। नवंबर में 'क्वाड' देशों की बैठक मनीला में होने की उम्मीद है। संभव है कि इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात हो। ऐसी किसी बैठक के बाद कई मुद्दों पर और अधिक स्पष्टता सामने आ सकती है।

उन्‍होंने कहा क‍ि भारत की नीति हमेशा से स्पष्ट और व्यावहारिक रही है। भारत अमेरिका के साथ अच्छे और मजबूत संबंध चाहता है लेकिन साथ ही अपने राष्ट्रीय हितों को भी प्राथमिकता देता है। विशेष रूप से भारत की सुरक्षा आवश्यकताएं और ऊर्जा सुरक्षा ऐसे मुद्दे हैं जिन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इसलिए भारत आगे भी अपने हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाता रहेगा।

पूर्व राजनयिक ने बताया क‍ि कुल मिलाकर भारत का रुख यही है कि दुनिया में शांति, संवाद और स्थिरता को बढ़ावा दिया जाए जबकि देश के आर्थिक, सुरक्षा और ऊर्जा हितों की भी पूरी तरह रक्षा की जाए। आने वाले समय में सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि ट्रंप युद्ध, विदेश नीति और घरेलू मुद्दों पर किस तरह की रणनीति अपनाते हैं। क्या वे समझौते और शांति की दिशा में आगे बढ़ेंगे या अपनी मौजूदा नीतियों को जारी रखेंगे, यह आने वाले महीनों में साफ होगा।

--आईएएनएस

एवाई/पीएम