भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में संवाद, शिखर सम्मेलन से पहले साझा की गई सालभर की झलक
नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान पिछले एक साल में संवाद, सहभागिता और सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गईं। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने मंगलवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले इस पूरी यात्रा की एक झलक साझा की।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता ने लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता निर्माण को केंद्र में रखते हुए संवाद और सहभागिता का एक पूरा वर्ष पूरा किया है।
मंत्रालय के अनुसार, यही चार स्तंभ भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की प्राथमिकताओं को परिभाषित करते हैं। इनके माध्यम से सदस्य देशों के बीच साझा चुनौतियों पर विचार-विमर्श, आपसी सहयोग को मजबूत करने और विकास के नए अवसर तलाशने पर जोर दिया गया।
विदेश मंत्रालय ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले वर्ष भर की गतिविधियों और पहलों की झलक वाला एक वीडियो भी साझा किया। इसमें भारत की अध्यक्षता के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में किए गए प्रयासों और सहयोग की दिशा को सामने रखा गया है।
इस क्लिप की शुरुआत एक संदेश के साथ होती है कि 'भविष्य पहले से तय नहीं होता है, इसका हम निर्माण करते हैं।' इसमें उस पावर की बात की गई है जो आज के अनिश्चित समय में भी लोगों को संवाद के जरिए समस्याएं सुलझाने के लिए प्रेरित कर रहा है। स्पष्ट किया गया है कि ये पावर एकजुटता और मिलकर आगे बढ़ने से आती है।
क्लिप में दो दशक पहले शुरू हुई एक आकांक्षा को खूबसूरत रिश्तों में बदलते देखा जा सकता है। ब्रिक्स जो पहले 4 देशों का गठबंधन था वो अब बढ़ कर 11 देशों का साथ बन गया है। भारत चौथी बार इसकी अध्यक्षता कर रहा है। जिसका ध्येय भारत की अध्यक्षता में लचीलेपन को वैश्विक संकटों से निपटने की क्षमता से, नवाचार को तकनीक और नए समाधानों से, सहयोग को सदस्य देशों के बीच साझेदारी से तथा स्थिरता को दीर्घकालिक और समावेशी विकास से जोड़कर देखना है। अब तक सदस्य देशों के 30 शहरों में ब्रिक्स की 400 से ज्यादा बैठकें हो चुकी हैं।
भारत में ये जिम्मेदारी किसी एक राज्य ने नहीं बल्कि कई राज्यों ने अलग-अलग समय पर उठाई है। इस एक साल में भारत ने संवाद को खूबसूरत आकार दिया है।
एमईए ने इस वीडियो में कमल आकार प्रतीक चिन्ह को परिभाषित किया है। उनके मुताबिक पहला स्तंभ (पहली पंखुड़ी) जमीन से जुड़ कर लचीलेपन को बनाए रखता है, जिसमें किसी भी विपरीत स्थिति का पता चलते ही सब तत्परता से जोखिम से पार पाने की कोशिश में जुट जाते हैं। इसका दूसरा स्तंभ नवाचार केंद्रित होता है। इसके तहत स्टार्ट अप फंड की व्यवस्था और नए आइडिया को फलने फूलने का मौका दिया जाता है।
तीसरा स्तंभ सहयोग के साथ आगे बढ़ने को प्रेरित करता है। इसके तहत आगे बढ़ने की सोच मायने रखती है। खुद को इतना बुलंद करना कि आवाज दूर तक सुनी जा सके। उद्देश्य स्पष्ट है कि ग्लोबल साउथ को सिर्फ सुनना नहीं है बल्कि इसे नेतृत्व भी करना है। चौथा स्तंभ स्थिरता और सतत विकास की ओर अग्रसर करने को प्रेरित करता है। सोच यही है कि लोगों को ग्रीन और क्लीन एनर्जी मिले।
भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती देने और विकासशील देशों के साझा हितों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने पर भी जोर दिया है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच ब्रिकिस देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी, सामाजिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाना इस समूह की भूमिका को और महत्वपूर्ण बनाता है।
--आईएएनएस
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