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भारत के साथ बातचीत से सुलझ सकते हैं विवाद, युद्ध समाधान नहीं : पाकिस्तान के कानून मंत्री तरार

 

नई दिल्ली, 8 नवंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कानून एवं न्याय मंत्री आजम नजीर तरार ने भारत के साथ बातचीत की वकालत की है। माना है कि युद्ध और बल प्रयोग किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकते। उन्होंने सिंधु जल संधि और आतंकवाद सहित दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने की जरूरत बताई।

विश्व बैंक की एक बैठक में शामिल हुए तरार ने आईएएनएस से बातचीत की। उन्होंने कहा, "दुनिया में कई बड़े विवाद बातचीत और समझौतों के जरिए सुलझाए गए हैं। भारत और पाकिस्तान को भी आपसी मतभेद दूर करने के लिए संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।"

वहीं, सिंधु जल संधि को लेकर किए गए सवाल पर उन्होंने कहा, "वर्ष 1960 में हुई यह संधि अपने आप में विशिष्ट रही है। दोनों देशों के बीच 1965 और 1971 के युद्ध तथा 1999 के कारगिल संघर्ष के बावजूद यह समझौता कायम रहा और दोनों देशों के बीच जल संबंधी आंकड़ों का आदान-प्रदान होता रहा। दुर्भाग्य से अब इस संधि को लेकर स्थिति बदल गई है। पाकिस्तान लगातार बातचीत की मांग करता रहा है और इस मामले को विश्व बैंक के समक्ष भी उठाया गया है। दोनों देशों को एक साथ बैठकर इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।"

तरार के मुताबिक "युद्ध कोई समाधान नहीं है और न ही बल प्रयोग से समस्याएं सुलझाई जा सकती हैं।" दोनों देशों की कुल आबादी 170 करोड़ से ऊपर की है। आबादी और परमाणु शक्ति संपन्न होने की स्थिति को देखते हुए शांति और सह-अस्तित्व की जरूरत और बढ़ जाती है।

दोनों देशों की संस्कृति और लोकाचार को उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा, "भारत और पाकिस्तान के लोगों के बीच संबंधों को लेकर मुझे कोई बड़ी समस्या नजर नहीं आती। भारत के कुछ हिस्सों और पाकिस्तान में खानपान, संस्कृति और सामाजिक परंपराओं में समानता है। हालांकि, इन संबंधों पर राजनीति और कश्मीर जैसे मुद्दों का भी प्रभाव पड़ता है।"

कश्मीर मुद्दे को लेकर उन्होंने अपने मुल्क के पारंपरिक रुख का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों को आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। यूरोपीय देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, "लंबे समय तक युद्ध और शत्रुता का इतिहास होने के बावजूद यूरोप के देश आज शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के साथ रह रहे हैं। भारत और पाकिस्तान को भी इससे सीखना चाहिए।"

सिंधु जल संधि पर अपने पक्ष को आगे बढ़ाते हुए तरार ने कहा, "पानी जीवन का आधार है और अंतरराष्ट्रीय कानून में निचले तटवर्ती देशों के जल अधिकारों का भी महत्व है। पानी के मुद्दे को राजनीतिक टकराव का विषय बनाने के बजाय दोनों देशों को बातचीत के जरिए हल करना चाहिए। पाकिस्तान जल संबंधी मुद्दों पर बातचीत के लिए हमेशा तैयार है।"

आतंकवाद के मुद्दे पर तरार ने कहा , "पाकिस्तान दशकों से आतंकवाद का सामना कर रहा है। मुझे लगता है कि आरोपों और प्रत्यारोपों के बजाय दोनों देशों को एक साथ बैठकर मुद्दों की पहचान करनी चाहिए और समाधान तलाशना चाहिए। आरोप-प्रत्यारोप से किसी देश को सकारात्मक नतीजा नहीं मिल सकता।" उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए अभी भी गुंजाइश मौजूद है।

तरार ने पाकिस्तान की हालिया कूटनीतिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों में इस्लामाबाद की भूमिका का दावा किया। कहा, " पाकिस्तान क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शांति की कोशिशों में भूमिका निभाना चाहता है।"

हालांकि, आतंकवाद के समर्थन के आरोपों को लेकर सवाल किए जाने पर उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका से इनकार किया। उन्होंने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हिंसा का उल्लेख किया।

पाकिस्तानी मंत्री के मुताबिक, "अतिवादी और कठोर रुख अपनाने से कोई समाधान नहीं निकलता। देशों को तार्किक ढंग से बातचीत के लिए तैयार रहना चाहिए। भारत और पाकिस्तान को बातचीत के जरिए अपने विवादों का समाधान तलाशना चाहिए। उनके अनुसार, दोनों देशों के आम लोगों को बेहतर जीवन, विकास और शांति का अधिकार है और सरकारों को भावी पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने चाहिए।"

--आईएएनएस

केआर/