भारत का सबसे बड़ा कृषि मेला रायसेन में लगने वाला है: शिवराज सिंह चौहान
भोपाल, 26 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरूवार को अपने संसदीय क्षेत्र रायसेन में राममंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन किया और देशवासियों को नवरात्रि के पावन पर्व पर अष्टमी व रामनवमी की शुभकामनाएं दी। साथ ही उन्होंने प्रभु श्रीराम से सभी देश व प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं, शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन के दशहरा मैदान में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के किसान मेले के पूर्व भूमिपूजन किया और तैयारियों का जायजा लिया। साथ ही व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि, भारत का सबसे बड़ा कृषि मेला रायसेन में लगने वाला है। ये अद्भुत और अभूतपूर्व होगा, जो किसानों की आमदनी बढ़ाएगा और खेती को नई दिशा देगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रायसेन की पवित्र धरती पर 11, 12 और 13 अप्रैल को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय कृषि मेले का आयोजन होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण मेला या कर्मकांड नहीं है, यह मेरी अंतरात्मा से निकला हुआ कार्यक्रम है। मध्य प्रदेश सरकार ने भी किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से ‘कृषक वर्ष’ घोषित किया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में साल भर ऐसी गतिविधियां चलेंगी जिनसे खेती की आमदनी बढ़ाने के रास्ते मजबूत हों। भारत सरकार ने भी इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। हमारा लक्ष्य है कि मध्य प्रदेश के किसानों की आय बढ़े और देश के किसानों की भी आय में वृद्धि हो। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रायसेन और विदिशा संसदीय क्षेत्र के किसानों तक सही जानकारी और नई तकनीक पहुंचाने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों की एक टीम विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास जिलों की एग्रो-क्लाइमेटिक कंडीशंस, जलवायु और मिट्टी का अध्ययन कर रही है, ताकि यह तय किया जा सके कि यहां के किसानों के लिए कौन-सी फसलें और तकनीक सबसे बेहतर रहेंगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन जिलों के लिए तैयार किया जा रहा कृषि रोडमैप भी इसी राष्ट्रीय कृषि मेले के दौरान जारी किया जाएगा। यह कृषि मेला किसानों को नई जानकारी, तकनीक और बेहतर खेती के रास्ते दिखाने में मील का पत्थर साबित होगा।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि रायसेन में आयोजित होने वाला राष्ट्रीय कृषि मेला केवल औपचारिक उद्घाटन और समापन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें किसानों को खेती से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। मेले में किसानों को उत्तम बीजों की पहचान, आधुनिक कृषि पद्धतियों, फसलों में रोग लगने पर उपचार, असली और नकली खाद की पहचान, पेस्टीसाइड के सही उपयोग जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी। इसके साथ ही फसल कटाई के बाद सुरक्षित भंडारण, वैल्यू एडिशन, कच्चे माल की प्रोसेसिंग और बाजार तक बेहतर तरीके से बिक्री के तरीकों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही यहां किसानों को लाइव डेमॉन्स्ट्रेशन भी दिखाए जाएंगे।
कृषि मंत्री ने कहा कि मेले में इंटीग्रेटेड फार्मिंग, पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस, पर ड्रॉप मोर क्रॉप तकनीक समेत कई आधुनिक कृषि विषयों पर अलग-अलग प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। किसानों की अलग-अलग रुचि और जरूरतों के हिसाब से यहां सत्र आयोजित होंगे, ताकि उन्हें खेती में नई तकनीक और बेहतर आय के रास्तों की जानकारी मिल सके।
उन्होंने कहा कि, इस मेले में बीज, मशीनीकरण, बागवानी, कृषि स्टार्ट-अप्स, फसलोपरांत प्रबंधन, भंडारण, प्रोसेसिंग और फसलों में रोग प्रबंधन जैसे विषयों पर अलग-अलग सत्र आयोजित किए जाएंगे। साथ ही ये भी बताया जाएगा कि किसान अपने खेती के खर्चे कैसे कम कर सकते हैं और मॉडर्न व स्मार्ट एग्रीकल्चर को कैसे अपना सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्ट-अप्स किसानों के सामने अपने नवाचार प्रस्तुत करेंगे, जिससे किसानों को नई सोच और प्रेरणा मिलेगी। किसानों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग पर विशेष जोर रहेगा। वर्कशॉप, सेमिनार और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का पूरा टाइम-टेबल तैयार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि, मेले का एक महत्वपूर्ण आकर्षण इंटीग्रेटेड फार्मिंग का मॉडल होगा। सिर्फ गेहूं और चावल से किसानों को पर्याप्त लाभ नहीं होगा। अगर किसी किसान के पास ढाई एकड़ जमीन है तो वह उसी जमीन पर फल-सब्जी की खेती, पशुपालन, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन या मछली पालन जैसे काम जोड़कर अधिक मुनाफा कैसे कमा सकता है, इसका प्रेजेंटेशन और लाइव डेमो भी यहां दिखाया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश और दुनिया में विकसित हो रही नई-नई कृषि मशीनों का भी प्रदर्शन होगा। इन मशीनों से किसानों का खर्चा कम हो सकता है और उत्पादन बढ़ सकता है। यहां किसान देख सकेंगे कि कौन-सी मशीन कैसे काम करती है और उसका उपयोग कैसे किया जा सकता है। साथ ही मेले में किसानों को नकली खाद और पेस्टीसाइड की पहचान करने के तरीके भी सिखाए जाएंगेंगे।
--आईएएनएस
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