भारत का बड़ा कदम, मालदीव को 30 अरब आईएनआर की मुद्रा विनिमय सहायता मंजूर
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत ने अपनी ‘पड़ोसी पहले’ नीति के तहत मालदीव को आर्थिक रूप से समर्थन देते हुए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ‘सार्क देशों के लिए मुद्रा विनिमय व्यवस्था’ के तहत 30 अरब आईएनआर की पहली निकासी को मंजूरी दी गई है, जिससे मालदीव की वित्तीय स्थिरता को मजबूती मिलेगी और दोनों देशों के बीच सहयोग और गहरा होगा।
मालदीव में भारतीय उच्चायोग के अनुसार, मालदीव के लोगों और सरकार को अपनी निरंतर आर्थिक और वित्तीय सहायता के हिस्से के रूप में भारत सरकार ने 'सार्क देशों के लिए मुद्रा विनिमय व्यवस्था के ढांचे' के तहत 30 अरब आईएनआर की पहली निकासी को मंजूरी दे दी है। इस व्यवस्था के तहत मालदीव भारत से रुपये उधार लेकर अपनी आर्थिक स्थिति संभाल सकता है।
इस व्यवस्था पर भारतीय रिजर्व बैंक और मालदीव सरकार के बीच अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज़ू की भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।
इससे पहले अक्टूबर 2024 में इसी व्यवस्था के तहत भी मालदीव ने 400 मिलियन यूएसडी लिए थे। जिसकी अवधि 23 अप्रैल 2026 को पूरी हो गई है।
2024-2027 की व्यवस्था के तहत, वर्तमान आईएनआर विनिमय सुविधा में ब्याज दरों और अन्य शर्तों के मामले में विभिन्न रियायतें शामिल हैं।
2012 में सार्क विनिमय ढांचे की शुरुआत के बाद से भारतीय रिजर्व बैंक ने मालदीव को कुल 1.1 अरब यूएसडी का विनिमय सहयोग प्रदान कर चुका है। मुद्रा विनिमय सुविधा मालदीव की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण तत्व साबित हुई है।
पिछले वर्ष भारत ने मालदीव सरकार के अनुरोध पर आपातकालीन वित्तीय सहायता के रूप में मालदीव सरकार की ओर से जारी किए गए 100 मिलियन यूएसडी मूल्य के ट्रेजरी बिलों को आगे बढ़ाया (रोल-ओवर किया) था।
मालदीव भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति और 'विजन महासागर' के तहत एक महत्वपूर्ण भागीदार है। एक मित्र पड़ोसी के रूप में भारत हमेशा मालदीव के लिए 'पहला मददगार' रहा है।
इससे पहले इसी माह में मालदीव के अनुरोध पर भारत ने वर्ष 2026-27 के लिए आवश्यक वस्तुओं के निर्यात को मंजूरी दे दी थी।
भारतीय उच्चायोग के अनुसार, मालदीव सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार ने एक विशेष द्विपक्षीय तंत्र के तहत वर्ष 2026-27 के लिए कुछ निश्चित मात्रा में आवश्यक वस्तुओं के निर्यात की अनुमति दे चुका है। जिनमें अंडे, आलू, प्याज, चावल, गेहूं का आटा, चीनी, दालें, पत्थर की गिट्टी और नदी की रेत शामिल हैं।
--आईएएनएस
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