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भारत-इजरायल संबंधों का आधार छह साझा मूल्य, ये बेहद खास : इजरायली राजदूत रूवेन अजार

 

नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने छह ऐसे मूल्यों का जिक्र किया है जो दोनों देशों के संबंधों को नया आयाम देते हैं और इन्हें और करीब लेकर आते हैं। ग्रीस में नवनियुक्त इजरायली राजदूत पनिनत यानाय की भारतीय समकक्ष रवि शंकर से हुई शिष्टाचार मुलाकात की पोस्ट को री शेयर करते हुए इजरायली राजदूत ने विशेष और अनूठे मूल्यों/स्तंभों का जिक्र किया।

एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, "भारत और इजरायल के बीच संबंध बेहद विशेष और अनूठे हैं। जब मैंने विचार किया कि आखिर इस रिश्ते को इतना असाधारण क्या बनाता है, तो मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि यह छह मूलभूत साझा मूल्यों पर आधारित है।"

उनके मुताबिक पहला मूल्य सभ्यतागत दृढ़ता और राष्ट्रीय पुनर्जागरण का है। रूवेन ने कहा, "सदियों तक हमारी सभ्यताओं को विदेशी शक्तियों के हमलों का सामना करना पड़ा। हमारी पहचान को निशाना बनाया गया और इतिहास के विभिन्न दौर में हमें हमारी पहचान से वंचित करने के प्रयास किए गए। लेकिन हजारों वर्षों में झेली गई तमाम कठिनाइयों के बावजूद हम जीवित रहे और हमारी पहचान भी कायम रही। यह ऐसी बात है जो भारत और इजरायल को एक-दूसरे से जोड़ती है। हम दोनों आधुनिक राष्ट्र हैं, जो अपनी व्यक्तिगत और राष्ट्रीय पहचान को पुनर्जीवित तथा मजबूत कर रहे हैं।"

इजरायली दूत ने फिर उस मूल्य की बात की जो दोनों देशों को आतंकवाद के खिलाफ डटे रहने की हिम्मत देता है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में उग्रवाद की एक लहर का सामना करना पड़ रहा है, विशेष रूप से कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद का, जो हमारे देशों के लिए खतरा है और इजरायल के मामले में तो उसके अस्तित्व के लिए ही चुनौती है। दशकों से इजरायल और भारत ने इस खतरे से निपटने के लिए आवश्यक क्षमताओं और साधनों को विकसित करने के लिए मिलकर काम किया है।

अजार ने फिर लोकतांत्रिक मूल्य का जिक्र किया। उन्होंने कहा," हम दोनों लोकतांत्रिक देश हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, उद्यमिता की स्वतंत्रता तथा स्वतंत्र सोच की भावना हमारे दोनों देशों की व्यवस्थाओं में गहराई से समाहित है। यही मूल्य हमारे समाजों को और मजबूत बनाते हैं।"

अपनी संदेश में आगे वो चौथे महत्वपूर्ण मूल्य पर बल देते हैं। वो नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता है। कहते हैं, " हम सभी समझते हैं कि जिस जीवन स्तर को हम हासिल करना चाहते हैं, उसके लिए केवल स्वतंत्रता ही पर्याप्त नहीं है। हमें नवाचार करने और दुनिया को बेहतर बनाने की क्षमता भी चाहिए। इजरायल और भारत दोनों ही नवाचार के महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं। दोनों देश मिलकर ऐसा अधिक प्रतिस्पर्धी वातावरण तैयार करने के लिए काम कर रहे हैं, जो हमारे देशों को और मजबूत तथा समृद्ध बना सके।"

अजार ने दोनों देशों को एक डोर में बांधने वाला पांचवा मूल सहिष्णुता और आध्यात्मिक विरासत का तो छठा और अंतिम निरंतर और समावेशी विकास का बताया। उनके मुताबिक ये पांचवां मूल्य हमें दूसरों को स्वीकार करने की समृद्ध परंपरा का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा, " यहूदी समुदाय सदियों से भारत में शांतिपूर्ण और सहज तरीके से रह रहा है। इस देश में कभी यहूदी-विरोधी भावना नहीं रही। यह केवल भारत में सदियों से रह रहे यहूदी समुदायों के कारण ही साझा विरासत नहीं है, बल्कि इसलिए भी है क्योंकि दोनों देशों में दूसरे धर्मों को स्वीकार करने, पूजा की स्वतंत्रता और धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करने की परंपरा रही है।"

वहीं, छठा और अंतिम मूल्य के जरिए हम यह सुनिश्चित करने का लगातार प्रयास करते हैं कि वे लोग, जो अवसरों की कमी, दूसरों से अलग होने या शारीरिक अथवा मानसिक अक्षमता जैसी वजहों से पीछे रह गए हैं, उन्हें भी अर्थव्यवस्था और समाज में समान रूप से शामिल किया जाए। इजरायल ने इस क्षेत्र में कई वर्षों से उल्लेखनीय काम किया है, विशेष रूप से सुगम्यता और समावेशन के क्षेत्र में। भारत में भी यह एक महत्वपूर्ण और लगातार बढ़ती प्राथमिकता बन रही है।

अपनी बात को विराम देते हुए इजरायली राजदूत कहते हैं, "कुल मिलाकर, छह स्तंभ और छह मूल्य हैं, जो भारत-इजरायल संबंधों को इतना विशेष बनाते हैं। कई अन्य देशों के साथ हमारे साझा हित हो सकते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि हमारे साझा मूल्य भी हों। भारत के साथ इजरायल इन मूलभूत मूल्यों को साझा करता है। इसलिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि हम साथ मिलकर काम करते हुए इन साझा मूल्यों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करें। इसके लिए न केवल अधिक विचार-विमर्श और संवाद की आवश्यकता है, बल्कि इन साझा मूल्यों को ठोस पहलों और सार्थक परिणामों में बदलने के लिए निवेश करने की भी जरूरत है।"

--आईएएनएस

केआर/