भारत-इंडोनेशिया के बीच 12वीं आर्मी स्टाफ वार्ता, रक्षा सहयोग मजबूत करने पर जोर
नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। भारत और इंडोनेशिया के बीच आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता हुई है। भारत व इंडोनेशिया के बीच इस सैन्य वार्ता का उद्देश्य रक्षा सहयोग को और मजबूत करना है। 11 से प्रारंभ हुई दोनों देशों की यह सैन्य वार्ता 13 अगस्त तक जारी रही। वार्ता में दोनों देशों की सेनाओं के बीच द्विपक्षीय सैन्य सहयोग को बढ़ाने और आपसी संबंधों को और गहरा करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
भारतीय सेना के मुताबिक, दोनों देशों के बीच यह 12वीं आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ टॉक्स है। भारत में आयोजित इस वार्ता में भारतीय सेना के प्रतिनिधिमंडल ने इंडोनेशियाई सेना टीएनआई-एडी के प्रतिनिधिमंडल के साथ विभिन्न रक्षा और सैन्य मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। इंडोनेशियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ब्रिगेडियर जनरल आरी प्रसत्य, वीएसीओएस इंटेलिजेंस ने किया।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने, संयुक्त प्रशिक्षण के दायरे को बढ़ाने और सैन्य विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को और व्यापक बनाने पर चर्चा की। दोनों सेनाओं के बीच नियमित संवाद और सहयोग के जरिए परिचालन अनुभव तथा विशेषज्ञता साझा करने के मुद्दे पर भी जोर दिया गया।
वार्ता में संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यासों के विस्तार को महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया गया। दोनों पक्षों ने प्रशिक्षण गतिविधियों के जरिए एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और सैन्य क्षमताओं को बेहतर ढंग से समझने तथा दोनों सेनाओं के बीच समन्वय और आपसी समझ को बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत और इंडोनेशिया की सेनाओं के बीच इस तरह की वार्ताएं दोनों देशों के सेना के बीच संबंधों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती हैं। इनके माध्यम से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने के अवसर मिलते हैं। दोनों पक्षों ने भारत और इंडोनेशिया के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
वार्ता का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों को और गहरा करना तथा क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के साझा हितों के अनुरूप सहयोग को आगे बढ़ाना है। यह 12वीं आर्मी टू आर्मी स्टाफ वार्ता 13 अगस्त को संपन्न हो रही है। यह वार्ता भारत और इंडोनेशिया के बीच लंबे समय से जारी रक्षा सहयोग और दोनों सेनाओं के बीच बढ़ती आपसी साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
--आईएएनएस
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