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भागलपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की डीएम ने की समीक्षा, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी

 

भागलपुर, 19 सितंबर (आईएएनएस)। भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडे की अध्यक्षता में शनिवार को जिला स्वास्थ्य समिति की मासिक समीक्षा बैठक हुई। बैठक में अगस्त की उपलब्धियों के साथ सितंबर में चलाए जा रहे विशेष स्वास्थ्य अभियानों की प्रगति की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर करने और निर्धारित लक्ष्यों को शत-प्रतिशत हासिल करने के निर्देश दिए। साथ ही, कुछ स्वास्थ्य संस्थानों के खराब प्रदर्शन पर नाराजगी जताते हुए सुधार नहीं होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी।

बैठक में 'भव्य' के माध्यम से 'स्कैन और शेयर' पंजीकरण की समीक्षा में बताया गया कि अगस्त में जिले में कुल 88,717 ओपीडी पंजीकरण के मुकाबले 87,722 'स्कैन और शेयर' ओपीडी पंजीकरण किए गए। यह करीब 99 प्रतिशत उपलब्धि है। वहीं, 'भव्य' के माध्यम से ऑनलाइन चिकित्सकीय परामर्श का अनुपात भी करीब 100 प्रतिशत रहा।

आईपीडी में भर्ती मरीजों के विटाल्स की जांच में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रंगरा का प्रदर्शन 17 प्रतिशत और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जगदीशपुर का 38 प्रतिशत रहा। इस पर जिलाधिकारी ने असंतोष जताते हुए संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को सितंबर में शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। लक्ष्य हासिल नहीं होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

इसी तरह आकस्मिक विभाग में भर्ती मरीजों के विटाल्स की जांच में रेफरल अस्पताल सुल्तानगंज की उपलब्धि महज दो प्रतिशत और अनुमंडलीय अस्पताल कहलगांव की 18 प्रतिशत रही। जिलाधिकारी ने आकस्मिक विभाग, ओपीडी और इंडोर विभाग के सभी मरीजों के विटाल्स की जांच करने और इसकी जानकारी अनिवार्य रूप से भव्य पोर्टल पर अपलोड करने को कहा।

एनसीडी अभियान के तहत 17 सितंबर तक भागलपुर जिले में 2,82,997 विशिष्ट व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। यह कुल लक्ष्य का 14.6 प्रतिशत और निर्धारित अवधि तक के लक्ष्य का 82.3 प्रतिशत है। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत अब तक 1,69,006 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। यह कुल लक्ष्य का 47 प्रतिशत और निर्धारित अवधि तक के लक्ष्य का 209 प्रतिशत है। जिलाधिकारी ने एनीमिया के लक्षण वाले सभी लोगों की सीबीईसी जांच कराने, बीमारी के कारणों की पहचान करने और समुचित उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

बैठक में टीबी मुक्त भारत अभियान की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि जिले में 3,93,255 लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया था, जिसके मुकाबले 6,12,484 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।

संवेदनशील आबादी श्रेणी में निर्धारित 3,05,664 लोगों के मुकाबले 62,572 लोगों का एक्स-रे किया गया। वहीं, 4,924 माइक्रोबायोलॉजी टेस्ट में से 4,915 न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट किए गए। इस तरह न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन जांच का अनुपात 99.8 प्रतिशत रहा।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान बताया गया कि पीएमएसएमए के तहत 3,586 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, जिनमें 827 हाई रिस्क गर्भावस्थाओं की पहचान हुई। इनमें से 746 हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं का प्रबंधन किया गया।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिन स्वास्थ्य संस्थानों में हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान का औसत जिले के औसत से कम है, वहां के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाए।

बैठक में एएनसी पंजीकरण, गर्भावस्था की पहली तिमाही में एएनसी, चार एएनसी जांच, आईएफए वितरण, संस्थागत प्रसव, सी-सेक्शन और पूर्ण टीकाकरण की स्थिति की भी समीक्षा की गई। रिपोर्टिंग माह में 8,830 बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हुआ, जो निर्धारित मासिक लक्ष्य का 110 प्रतिशत है। वहीं, संस्थागत प्रसव की उपलब्धि 78 प्रतिशत दर्ज की गई।

भागलपुर में निर्धारित 3,191 आशा पदों के मुकाबले अभी 2,690 आशाओं का चयन हुआ है और 501 पद रिक्त हैं। जिलाधिकारी ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को अभियान चलाकर एक महीने के अंदर सभी रिक्त पदों पर आशाओं का चयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

एम-आशा पोर्टल पर दर्ज कुल 2,310 आशाओं में से 2,197 सक्रिय हैं। इस तरह पोर्टल पर आशाओं की सक्रियता 95.11 प्रतिशत दर्ज की गई है।

बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आरबीएसके टीमों ने अगस्त में कुल 18,852 बच्चों की स्क्रीनिंग की। एनआरसी रेफरल की समीक्षा के दौरान जून से अगस्त 2026 तक कुल 94 एसएएम बच्चों के रेफरल की जानकारी भी बैठक में दी गई।

इसके अलावा स्वास्थ्य संस्थानों की ओपीडी, ईएचआर, आईपीडी, इमरजेंसी सेवाओं, बेड ऑक्यूपेंसी, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार नियोजन कार्यक्रम की प्रगति पर भी चर्चा हुई। अगस्त में जिले की बेड ऑक्यूपेंसी दर 99.02 प्रतिशत दर्ज की गई।

जिलाधिकारी अलंकृता पांडे ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में लगातार सुधार करने और लक्षित लाभार्थियों तक सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को समीक्षा में सामने आई कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने और स्वास्थ्य कार्यक्रमों की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी