वंदे मातरम का सम्मान जरूरी, राष्ट्रगीत पर सियासत करना बिल्कुल गलत: यासूब अब्बास
कानपुर, 16 अगस्त (आईएएनएस)। शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने 'वंदे मातरम' का सम्मान करने की अपील करते हुए राजनीतिक दलों से चुनावी फायदे के लिए धर्म का इस्तेमाल न करने की बात कही। उन्होंने कहा कि देश की तरक्की शिक्षा, रोजगार और विकास से ही संभव है।
मौलाना यासूब अब्बास ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "वंदे मातरम को बीच में रोकना बिल्कुल गलत है। जो हमारा राष्ट्रगीत है, और जिसके अंदर राष्ट्रभक्ति की बात हो, उसे पूरा सम्मान देना चाहिए। उसकी पूरी इज्जत करनी चाहिए। वंदे मातरम को लेकर सियासत नहीं करनी चाहिए। वंदे मातरम का मतलब है, 'हे मां, हम तुम्हें नमन करते हैं।'"
उन्होंने धर्म और देशभक्ति के संबंध पर भी अपनी राय रखी और कहा, "मुसलमान की बात करें तो मुसलमान सिर्फ अल्लाह को मानता है, उसके सामने ही सजदा करता है। वह और किसी का सजदा नहीं करता। जहां पर पहले मजहब की मोहब्बत होती है और उसके बाद वतन की मोहब्बत होती है, वहां तालीबानी संस्कृति बुरी तरीके से पनपती है। देश पहले होना चाहिए।"
मौलाना ने राजनीतिक दलों पर आरोप लगाया कि वे वोट के लिए समाज को बांट रहे हैं। उन्होंने कहा, "अगर मुसलमानों के लिए कहा जाए कि कांग्रेस ने बहुत कुछ किया, तो गलत है। सियासी पार्टी अपने वोट को बहुत फायदा देती है। आज मुसलमान के इलाकों को कोई देखे, वहां पर गरीबी, बेरोजगारी और अशिक्षा है। मुसलमान इस वक्त दबा-कुचला है। सिर्फ मुसलमान की बात नहीं, बल्कि हिंदुओं का भी यही हाल है।"
उन्होंने कहा, "धर्म के नाम पर नौजवानों को भटकाना ठीक नहीं है। मजहब और धर्म का निशाना बनाकर कोई भी राजनीति नहीं करनी चाहिए। नौजवानों को खराब न करें। हमें अपने बच्चों को स्कूल भेजना है, उन्हें हुनर देना है, रोजगार देना है। जब तक शिक्षा नहीं होगी, तब तक कोई भी कौम आगे नहीं बढ़ सकती।"
यासूब अब्बास ने कहा, "जिन्हें हक नहीं दिया जाता है, वह पिछड़ी कौम होती है और जिन पर ध्यान दिया जाता है, वह आगे निकल जाती है। सरकारों को चाहिए कि वे धर्म देखकर नहीं, बल्कि जरूरत देखकर काम करें। हमारा मकसद नफरत नहीं, मोहब्बत होना चाहिए। अगर देश आगे बढ़ेगा तो हम सब आगे बढ़ेंगे। इसलिए वंदे मातरम जैसे राष्ट्रगीत का सम्मान करें और राजनीति को विकास, शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर लेकर आएं।"
--आईएएनएस
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