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महुआ मोइत्रा को बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल का लीगल नोटिस, वीडियो में जाने 10 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग

 

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा को सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में कथित तौर पर मानहानिकारक टिप्पणियों को लेकर 10 करोड़ रुपये के मुआवजे और बिना शर्त माफी की मांग की गई है। इसके अलावा, कानूनी खर्च के लिए 50 हजार रुपये देने को भी कहा गया है। नोटिस के मुताबिक, महुआ मोइत्रा को 24 घंटे के भीतर विवादित दो सोशल मीडिया पोस्ट हटाने, लिखित रूप में माफी मांगने और भविष्य में इस तरह की टिप्पणी नहीं करने का आश्वासन देने को कहा गया है। यह विवाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर लगाए गए आरोपों से जुड़ा है।

महुआ ने मतदाताओं के अधिकार छीनने का लगाया था आरोप

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महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मनोज अग्रवाल पर पश्चिम बंगाल में लाखों वैध मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया था। अग्रवाल पहले राज्य में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पद पर कार्य कर चुके हैं। SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची की जांच और पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आए थे।महुआ ने 9 अक्टूबर को एक्स पर पोस्ट में लिखा था, “प्रिय बंगाल के पूर्व मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल, आज 300 सांसद विजय चौक पर खड़े हुए और आपके बिग बॉस को बताया कि वह चोर हैं और जेल जाएंगे।”इस पोस्ट को लेकर अग्रवाल की ओर से कानूनी कार्रवाई की गई है। हालांकि, महुआ के आरोप और अग्रवाल की ओर से उठाए गए कानूनी कदम अलग-अलग पक्षों के दावे हैं। आरोपों की सत्यता का निर्धारण संबंधित तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

वकील ने कहा- कानून के मुताबिक निभाई जिम्मेदारी

मनोज अग्रवाल के वकील के अनुसार, उन्होंने चुनाव आयोग के निर्देशों और लागू कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाई थीं। नोटिस में महुआ की टिप्पणियों को लेकर आपत्ति जताई गई है और उनसे पोस्ट हटाने तथा माफी मांगने की मांग की गई है।10 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग और कानूनी खर्च की भरपाई की बात भी नोटिस का हिस्सा है। यह एक कानूनी नोटिस है; इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि महुआ के खिलाफ लगाए गए आरोप सही हैं या अदालत ने कोई फैसला सुना दिया है।

SIR को लेकर राजनीतिक विवाद

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। इस प्रक्रिया में मतदाता सूची की जांच की जाती है, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम शामिल रहें और सूची में मौजूद त्रुटियों को सुधारा जा सके। वहीं, विपक्षी दलों की ओर से कभी-कभी यह आशंका जताई जाती है कि प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं।महुआ मोइत्रा और मनोज अग्रवाल के बीच यह विवाद इसी व्यापक बहस के बीच सामने आया है। अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि महुआ नोटिस पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं और संबंधित पक्ष कानूनी प्रक्रिया में आगे क्या कदम उठाते हैं।