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बाजार की पाठशाला: आईटीआर फाइल करते समय बचाना चाहते हैं टैक्स, इन 6 जरूरी डिडक्शन को क्लेम करना न भूलें

 

नई दिल्ली, 26 जुलाई (आईएएनएस)। आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करते समय अधिकतर लोग अपनी आय और टैक्स की जानकारी तो सही भर देते हैं, लेकिन कई बार ऐसे महत्वपूर्ण टैक्स डिडक्शन का दावा करना भूल जाते हैं, जिनकी मदद से उनकी टैक्स देनदारी काफी कम हो सकती है। इसका नतीजा यह होता है कि करदाता जरूरत से ज्यादा टैक्स चुका देते हैं। यदि आपने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आईटीआर दाखिल करना है और पुराना टैक्स रिजीम चुना है, तो कुछ महत्वपूर्ण डिडक्शन का लाभ उठाकर अच्छी-खासी टैक्स बचत की जा सकती है।

ध्यान रखने वाली बात यह है कि नए टैक्स रिजीम में इन अधिकांश डिडक्शन का लाभ उपलब्ध नहीं होता। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले दोनों टैक्स रिजीम की तुलना जरूर कर लें, ताकि यह तय किया जा सके कि किस विकल्प में आपको अधिक बचत मिलेगी।

अगर आपने पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ), कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट, ईएलएसएस, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी), सुकन्या समृद्धि योजना, जीवन बीमा प्रीमियम, बच्चों की ट्यूशन फीस या होम लोन के मूलधन का भुगतान किया है, तो सेक्शन 80सी के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक की टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है। यह टैक्स बचाने का सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला प्रावधान है।

वहीं, अगर आपने नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में निवेश किया है, तो सेक्शन 80सीसीडी(1बी) के तहत 50,000 रुपए तक की अतिरिक्त टैक्स छूट मिल सकती है। यह छूट सेक्शन 80सी से अलग होती है। यानी 80सी और 80सीसीडी(1बी) को मिलाकर कुल 2 लाख रुपए तक की टैक्स बचत संभव है।

यदि आपने अपने, जीवनसाथी, बच्चों या माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली है, तो सेक्शन 80डी के तहत टैक्स छूट का लाभ मिल सकता है। यह छूट परिवार की स्थिति और वरिष्ठ नागरिकों के आधार पर 25,000 से 1 लाख रुपए तक हो सकती है। हालांकि, प्रीमियम का भुगतान बैंकिंग माध्यम से किया गया होना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, उच्च शिक्षा के लिए लिया गया एजुकेशन लोन भी टैक्स बचाने में मदद करता है। सेक्शन 80ई के तहत एजुकेशन लोन पर चुकाए गए ब्याज की पूरी राशि पर निर्धारित अवधि तक टैक्स छूट मिलती है। इसमें किसी अधिकतम सीमा का प्रावधान नहीं है। हालांकि, यह छूट केवल ब्याज पर मिलती है, लोन के मूलधन पर नहीं।

वहीं, अगर आपने सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी संस्था, ट्रस्ट या राहत कोष में दान दिया है, तो सेक्शन 80जी के तहत 50 प्रतिशत या 100 प्रतिशत तक टैक्स छूट मिल सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि दान किस संस्था को दिया गया है। डिडक्शन का दावा करने के लिए दान की रसीद और संबंधित संस्था का पंजीकरण विवरण सुरक्षित रखना जरूरी है।

इसके साथ ही, अगर आपने घर खरीदने के लिए होम लोन लिया है तो सेक्शन 24(बी) के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपए तक की टैक्स छूट का लाभ लिया जा सकता है। ध्यान रहे कि यह छूट केवल ब्याज पर मिलती है, जबकि होम लोन का मूलधन सेक्शन 80सी के तहत क्लेम किया जाता है।

रिटर्न दाखिल करने से पहले फॉर्म 16, एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (एआईएस) और फॉर्म 26एएस का मिलान जरूर कर लें, ताकि आपकी आय और टैक्स कटौती की जानकारी में कोई अंतर न रहे। जिन डिडक्शन का दावा करना है, उनसे जुड़े सभी दस्तावेज और रसीदें अपने पास रखें। साथ ही, अपनी आय और निवेश के अनुसार सही टैक्स रिजीम का चयन करें। बैंक खाते, पैन, आधार और अन्य व्यक्तिगत जानकारी सही दर्ज करें। सबसे महत्वपूर्ण बात, आईटीआर दाखिल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन जरूर पूरा करें, क्योंकि इसके बिना आपकी रिटर्न प्रक्रिया अधूरी मानी जा सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आयकर रिटर्न भरना केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सही टैक्स प्लानिंग का भी हिस्सा है। यदि आप उपलब्ध टैक्स डिडक्शन का सही तरीके से लाभ उठाते हैं और सभी जरूरी दस्तावेजों का मिलान करके रिटर्न दाखिल करते हैं, तो न केवल अतिरिक्त टैक्स देने से बच सकते हैं बल्कि भविष्य में किसी भी तरह की टैक्स संबंधी परेशानी से भी दूर रह सकते हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी/एएस