बस्ती: 63.59 करोड़ के अटल आवासीय विद्यालय में भरा पानी, छात्रों की सुरक्षा पर सवाल
बस्ती, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। यूपी के बस्ती में 63.59 करोड़ रुपए की लागत से बने अटल आवासीय विद्यालय में जलभराव की समस्या गंभीर बनी हुई है। करीब एक सप्ताह से परिसर में एक से दो फीट तक पानी जमा है और यह पानी स्कूल की सीढ़ियों और हॉस्टल के प्रवेश द्वार तक पहुंच गया है। जलभराव के चलते छात्रों को रोज पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। छात्रों ने पैरों में खुजली और दाने होने की शिकायत भी की है। वहीं, रात के समय बिजली कटने पर परिसर में अंधेरा होने की आशंका से भी परेशानी बढ़ गई है।
स्थिति का जायजा लेने के लिए अधिकारियों ने 1 अक्टूबर को विद्यालय का स्थलीय निरीक्षण किया। मंडलायुक्त और मुख्य विकास अधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जलभराव की स्थिति देखी और समस्या के समाधान को लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए।
छात्र अंश तिवारी ने बताया कि परिसर में करीब एक सप्ताह से पानी भरा हुआ है। छात्र ने बताया कि अधिकारियों के निरीक्षण के बाद जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन मिला है। पिछले साल भी इसी तरह जलभराव की समस्या सामने आई थी। छात्रों को पानी से निकलने के बाद पैर धोने की सलाह दी जा रही है। पानी में चलने के कारण पैरों में दाने और खुजली की समस्या हो रही है।
एक अन्य छात्र जितेंद्र ने बताया कि छात्रों को रोज पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल बच्चों को बहुत ज्यादा परेशानी नहीं है, लेकिन पैरों में खुजली और दाने निकलने लगे हैं। रात में कभी-कभी बिजली कटने की स्थिति में परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि बाहर पानी भरा हुआ है। विद्यालय के पास से मनोरमा नदी गुजरती है और करीब एक सप्ताह से जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
श्रम विभाग की अपर आयुक्त रचना केशरवानी ने बताया कि विद्यालय में इस समय करीब डेढ़ से दो फीट तक पानी जमा है और यह सीढ़ियों तक पहुंच चुका है। उन्होंने इसे छात्रों को प्रभावित करने वाली गंभीर समस्या बताया। 1 अक्टूबर को मंडलायुक्त और मुख्य विकास अधिकारी के साथ मौके पर निरीक्षण किया गया और पहले से चल रही कार्रवाई की समीक्षा की गई।
रचना केशरवानी ने बताया कि विद्यालय में जुलाई 2024 में शैक्षणिक सत्र शुरू होने के समय भी जलभराव की समस्या सामने आई थी। इसके बाद स्थायी समाधान के लिए लोक निर्माण विभाग भवन की ओर से कार्ययोजना तैयार की गई। पहले करीब 725 लाख रुपए का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे बाद में संशोधित कर करीब 872 लाख रुपए किया गया। प्रस्ताव में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए कई तकनीकी कार्य शामिल हैं। पहले दिए गए 725 लाख रुपए के प्रस्ताव में यह भी कहा गया था कि खर्च करने से पहले किसी विश्वविद्यालय या तकनीकी संस्थान से योजना का परीक्षण कराया जाए। बाद में लोक निर्माण विभाग ने इसे आईआईटी को परीक्षण के लिए भेजा। जनवरी 2026 में हुई बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने विभाग के उच्चाधिकारियों से स्थिति स्पष्ट कर स्थायी समाधान के लिए प्रस्ताव को आगे बढ़ाने को कहा था।
जलभराव की वजह बताते हुए अपर आयुक्त ने कहा कि विद्यालय का क्षेत्र काफी नीचे और लो-लैंड में है। इसके अलावा विद्यालय का सीवरेज सिस्टम जिस नाले से जुड़ा है, मनोरमा नदी में बाढ़ आने पर उसके ओवरफ्लो होने की स्थिति बनती है। इससे पानी वापस विद्यालय की ओर आने लगता है। बाउंड्री वॉल के नीचे से भी पानी परिसर में पहुंचने की बात सामने आई है। फिलहाल पानी निकालने के लिए पंपिंग सेट लगाने पर भी विचार किया गया, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक 2024 में ऐसी कोशिश के दौरान यह आशंका सामने आई थी कि पानी को बाहर निकालने पर वह रिसाव के जरिए दोबारा परिसर में वापस आ सकता है। ऐसे में तत्काल प्राथमिकता छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को दी गई है।
अपर आयुक्त ने बताया कि कक्षा 6 से 11 तक के छात्रों को 10 अक्टूबर तक उनके अभिभावकों के पास भेज दिया गया है। छात्रों, उनके अभिभावकों, ग्रुप कैप्टन और शिक्षकों से चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया। हालांकि कक्षा 10 के छात्रों को फिलहाल रोका गया था, क्योंकि उनका 5 से 10 अक्टूबर तक मॉक टेस्ट निर्धारित है। इन परीक्षाओं के प्रश्नपत्र बोर्ड से पहले ही भेजे जाते हैं और उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर भेजने की प्रक्रिया होती है। लेकिन अब जलभराव बढ़ने और स्कूल के सोलर पैनल के भी पानी में डूबने की आशंका के बाद बिजली व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा है।
उन्होंने आगे बताया कि पहले चरण में 10 अक्टूबर तक छुट्टी रहेगी। इसके बाद हालात की समीक्षा की जाएगी। यदि जलभराव नियंत्रित हो गया तो छात्रों को 11 अक्टूबर से वापस बुलाया जा सकता है। स्थिति सामान्य नहीं होने पर छुट्टी को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
--आईएएनएस
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