बाराबंकी में सरयू-घाघरा का रौद्र रूप, 150 साल पुरानी मस्जिद के बाद 1100 साल पुराने मंदिर के नदी में समाने का खतरा
बाराबंकी, 28 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के जनपद बाराबंकी के सूरतगंज ब्लॉक इलाके में सरयू-घाघरा नदी का रौद्र रूप लगातार बढ़ता जा रहा है। लगातार बारिश के चलते नदी का बहाव तेज है और किनारे की जमीन लगातार नदी में समाती जा रही है। कई परिवार अपने घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।
कई दिनों से नदी के मुहाने पर खड़ी लगभग डेढ़ सौ साल पुरानी मस्जिद तेज धारा की चपेट में आकर नदी में समा गई। वहीं, अब कटान लगभग ग्यारह सौ पुराने बाबा नारायण दास मंदिर के बेहद करीब पहुंच गई है।
ग्रामीणों को आशंका है कि अगर कटान की रफ्तार जारी रही तो बचे हुए घरों के साथ बाबा नारायण दास मंदिर को भी नुकसान पहुंच सकता है। कहा जाता है कि सरयू नदी कितनी भी बढ़ जाए, लेकिन सरयू की लहरें मंदिर को छूकर वापस चली जाती हैं, लेकिन इस बार स्थित काफी भयावह हो गई है।
एक स्थानीय बुजुर्ग ने आईएएनएस से कहा, "प्रशासन पहले कार्य करवाया, इसमें प्रशासन की लापरवाही हुई, क्योंकि एक हफ्ता काम बंद रहा। अगर उसी बीच से काम चालू रहता तो आज मंदिर के नदी में समाने का खतरा नहीं रहता।”
उन्होंने बताया कि अभी तक 40 से 50 घर नदी में समा चुके हैं। एक हनुमान मंदिर और शिव मंदिर भी नदी में समा चुके हैं। एक मस्जिद भी नदी में समा चुकी है। अभी बाबा नारायण दास मंदिर पर खतरा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन से अनुरोध किया कि किसी भी तरीके से मंदिर को बचाया जाए।
यहां मंदिर और मस्जिद सिर्फ 20 मीटर की दूरी पर हैं। मस्जिद के सरयू में समाने के बाद मुस्लिम दुआ कर रहे हैं कि मंदिर बच जाए। वहीं, हिंदू बुजुर्ग को मस्जिद के सरयू में चले जाने का अफसोस है।
हाफिज मोहम्मद सादाब ने आईएएनएस से कहा कि मस्जिद और मंदिर दोनों काफी पुराने थे। अभी मस्जिद नदी में बाढ़ के कारण उसमें समा चुकी है। हम यह दुआ कर रहे हैं कि जो मंदिर अभी बचा हुआ है, वह सुरक्षित खड़ा रहे।
जिला प्रशासन की तरफ से एसडीएम रामनगर आकांछा गुप्ता और तहसीलदार विपुल सिंह भी कई दिनों से कटान वाले स्थान पर बचाव कार्य करा रहे हैँ , ताकि नदी की धारा में बचे हुए घरों और महत्वपूर्ण स्थलों को समाने से बचाया जा सके।
महंत अजय दास ने कहा, “यहां नदी का कटान 10-12 दिन पहले शुरू हुआ था। बीच में नदी का जलस्तर घट चुका था, लेकिन दोबारा से जलस्तर बढ़ने के बाद अचानक तेजी से कटान हुआ है। कई घर और एक मस्जिद भी नदी में समा गई है। बाबा नारायण दास मंदिर तक नदी का पानी आ चुका है। अभी यहां प्रशासन कार्य में जुटा हुआ है।
उधर, बाराबंकी के बाढ़ खंड विभाग के अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह पिछले एक हफ्ते से अपने कर्मचारियों और अन्य अधिकारियों के साथ मंदिर को कटान से बचाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास में जुटे हैं। अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह ने कहा, "गिरजा बैराज में 3 लाख का डिस्चार्ज पास हो रहा है और शारदा बैराज में 1,57,000 का डिस्चार्ज है। इससे घाघरा का जलस्तर बढ़ा है। नदी इस समय अपनी पूरी गति से बह रही है।”
--आईएएनएस
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