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बल्लेबाजों के घूरने से गेंदबाज को परेशान नहीं होना चाहिए: हरप्रीत बरार

 

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। पंजाब किंग्स के स्पिनर हरप्रीत बरार मैदान पर विराट कोहली के साथ हुई नोक-झोंक की चर्चाओं को ज्यादा तवज्जो नहीं देते। इस खिलाड़ी का मानना है कि दोनों के बीच कोई दुश्मनी नहीं है और एक गेंदबाज का ध्यान पूरी तरह से अपने काम पर होना चाहिए, चाहे दूसरी तरफ कोई भी बल्लेबाजी कर रहा हो।

हरप्रीत बरार ने पहले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में कोहली को आउट किया है, उन्होंने कहा कि दोनों खिलाड़ियों के बीच दिखने वाली आक्रामकता फ्रेंचाइजी क्रिकेट की प्रतिस्पर्धी प्रवृत्ति का हिस्सा है, न कि कोई निजी मुकाबला।

बरार ने गुरुवार को 'आईएएनएस' के साथ एक खास बातचीत में कहा, "ऐसा नहीं है। यह टीम के लिए अच्छा है। 'राइवलरी' जैसी कोई बात नहीं है। यह सब सोशल मीडिया का एक हथकंडा है जो वहीं शुरू होता है और वहीं खत्म हो जाता है। मैं पंजाब किंग्स के लिए खेलता हूं, वह आरसीबी के लिए खेलते हैं। मैंने उनके साथ सिर्फ फ्रेंचाइजी क्रिकेट खेला है। हम दोनों टीम के लिए अच्छा करना चाहते हैं।"

बरार का मानना ​​है कि कोहली का हमेशा बना रहने वाला प्रतिस्पर्धी स्वभाव उन खूबियों में से एक है, जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट में इतना बड़ा खिलाड़ी बनाया है। स्पिनर ने उस आक्रामकता को ऐसी चीज के तौर पर भी देखा है जिससे युवा खिलाड़ी सीख सकते हैं।

बरार ने कहा, "कोहली ने इतने सारे मैच खेले हैं, और वह आज भी उसी तरह खेलते हैं जैसे 18 साल की उम्र में खेलते थे। मैदान पर उनका आक्रामक अंदाज आज भी वैसा ही है। हमने भी उनसे ये चीजें सीखी हैं।"

बरार के अनुसार, सिर्फ सम्मान इसलिए खत्म नहीं हो जाता कि दोनों एक-दूसरे के खिलाफ खेल रहे हैं। उन्होंने कहा, "कोहली इस खेल के लीजेंड हैं। वह लीजेंड्स में से एक हैं। मैदान के अंदर और बाहर उनके लिए सम्मान एक जैसा ही है।"

बरार का मानना ​​है कि प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में खेल शुरू होने के बाद भावनाओं के लिए बहुत कम जगह होती है। उन्होंने कहा कि मकसद अपनी टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन करना होता है, चाहे निजी रिश्ते कैसे भी हों। उन्होंने कहा, "हम मैदान पर अपना काम करते हैं। हमने यह उनसे ही सीखा है। वह कभी ऐसा बहाना नहीं बनाएंगे कि ‘वह मेरा दोस्त है, इसलिए मैं उसे चौका या छक्का नहीं मारूंगा।’ ऐसा नहीं है। यह मुमकिन नहीं है। वह अपनी टीम के लिए अच्छा खेलना चाहते हैं; बाकी सब तो मजाक-मस्ती है। हमने हमेशा उनसे सीखा है। वह भविष्य के युवा खिलाड़ियों के लिए एक बेहतरीन उदाहरण हैं कि क्रिकेट कैसे खेला जाना चाहिए।"

कोहली के साथ बरार का अपना इतिहास भी उनके मुकाबलों में एक अलग पहलू जोड़ता है। पंजाब किंग्स के स्पिनर ने आरसीबी के पूर्व कप्तान को उसी स्पेल में आउट किया था जिसमें उन्होंने ग्लेन मैक्सवेल और एबी डिविलियर्स को पवेलियन लौटाया। बरार ने कहा कि बल्लेबाज कौन है, इससे एक गेंदबाज के तौर पर उनकी जिम्मेदारी नहीं बदलती।

उन्होंने कहा, "बतौर गेंदबाज आपमें हमेशा वह जोश होना चाहिए; इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके सामने विराट कोहली बल्लेबाजी कर रहे हैं, या कोई युवा खिलाड़ी। बतौर गेंदबाज मेरी ड्यूटी है कि मैं उनका विकेट लूं या अपनी टीम के लिए अच्छा ओवर डालूं। यही मकसद होना चाहिए।"

बरार मानते हैं कि कोहली की गुस्सैल छवि का गेंदबाज की सोच पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, "किसी के गुस्से भरी नजरों से घूरने से गेंदबाज को परेशान नहीं होना चाहिए।"

बरार ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि ऐसे पलों में कोहली सीधे उन्हें ही घूर रहे होते हैं; उन्होंने इसके बजाय इस बात की ओर इशारा किया कि कैसे टीवी कैमरे मैदान पर होने वाली बातचीत और हरकतों को कैद करते हैं।

बरार ने कहा, "मैंने उन्हें कभी मुझे घूरते हुए नहीं देखा। कैमरे के एंगल ऐसे होते हैं। जब हम मैदान पर होते हैं, तो ऐसा लगता है कि वे मुझे घूर रहे हैं, लेकिन असल में ऐसा नहीं होता। आप सिर्फ स्टंप माइक के आस-पास की बातचीत सुन सकते हैं। आप और कुछ नहीं सुन सकते, लेकिन घूरने की बात करें तो ऐसा नहीं है।"

बरार ने बताया कि कप्तानों और खिलाड़ियों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं प्रतिस्पर्धी क्रिकेट का आम हिस्सा हैं, हालांकि कोहली की बड़ी पहचान की वजह से उनके हाव-भाव पर अधिक ध्यान जाता है।

उन्होंने कहा, "हमारी टीम के कप्तान भी हमें घूरते हैं। उस पर कभी ध्यान नहीं दिया जाता, लेकिन विराट एक बड़ी शख्सियत हैं। वह एक बेहतरीन इंसान हैं। अधिकतर समय कैमरा उन्हीं पर होता है। आप उनका आक्रामक अंदाज देख सकते हैं। उन्हें मुझे ही घूरने की जरूरत नहीं है; वह किसी और को भी घूर सकते हैं।"

--आईएएनएस

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