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बदरीनाथ चढ़ावा चोरी मामले में गरमाई सियासत, गणेश गोदियाल ने सीएम धामी से मांगा जवाब

 

देहरादून, 20 जुलाई (आईएएनएस)। बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दूसरी गिरफ्तारी के बाद सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मामले में सामने आए तथ्यों के बावजूद जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मंदिर समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों को बचाने का प्रयास कर रही है, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है।

गणेश गोदियाल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में सोमवार को कहा कि चोरी के मामले में गिरफ्तार किए गए दूसरे आरोपी ने पूछताछ के दौरान स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि उसे यह कृत्य करने के निर्देश वरिष्ठ स्तर से मिले थे। आरोपी ने प्रमोद नौटियाल का नाम लेते हुए कहा कि उन्हीं के माध्यम से उसे यह निर्देश दिए गए थे। गोदियाल ने दावा किया कि मंदिर समिति में अध्यक्ष के अलावा वरिष्ठ स्तर पर कोई अन्य निर्णय लेने वाला नहीं होता, इसलिए इस मामले में जिम्मेदारी तय होना स्वाभाविक है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मामले से जुड़े तथ्य सामने आने के बावजूद मुख्यमंत्री की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यह खबरें पिछले कई दिनों से मीडिया और आम जनता के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं, लेकिन सरकार की ओर से चुप्पी साधे रखना कई सवाल खड़े करता है। इससे ऐसा प्रतीत होता है मानो 'तुम मेरी पोल मत खोलो, मैं तुम्हारी पोल नहीं खोलूंगा' जैसी स्थिति बनी हुई है। बदरीनाथ मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इस प्रकार की घटनाएं लोगों के विश्वास को गहरा आघात पहुंचाती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से सामने आकर पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। साथ ही कहा कि यदि कांग्रेस के आरोप गलत हैं तो सरकार तथ्यों के साथ उसका जवाब दे।

मंदिर समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए गोदियाल ने कहा कि जिस व्यक्ति को पहले तराई बीज विकास निगम में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते बर्खास्त किया जा चुका हो, उसे धामी सरकार ने मंदिर समिति जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का अध्यक्ष कैसे बना दिया। मंदिर समिति के अध्यक्ष का पद अत्यंत सम्मान और जिम्मेदारी वाला पद है, क्योंकि इस संस्थान की स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी। ऐसे पद पर नियुक्ति से पहले व्यक्ति के पूरे अतीत और कार्यशैली की गहन जांच होनी चाहिए थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने नियुक्ति के दौरान आवश्यक जांच-पड़ताल नहीं की, बल्कि केवल कृपा दिखाई। यह कृपा किस कारण से की गई, इसका खुलासा भी धीरे-धीरे सामने आएगा। उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने सहकारिता क्षेत्र में हुए कथित घोटालों को सार्वजनिक रूप से उठाया। इसके बाद उन पर जांच का दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं अपनी जांच कराने में कभी आपत्ति नहीं जताई, लेकिन सवाल यह है कि उनकी जांच का डर दिखाकर अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। इसी कारण उन्होंने मंदिर समिति से जुड़े इस मामले को भी जनता के सामने उठाया है।

गौरतलब है कि बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दूसरी गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। इस पूरे मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। ऐसे में अब हर किसी की नजरें सरकार और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

--आईएएनएस

पीएसके