☰
×

‘बड़ी दीदी की शादी रुक गई', बीएसएफ से निकाले जाने पर बोले दीपक

 

नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली के रहने वाले दीपक को कभी नहीं पता था कि एक दिन उनके सामने नौकरी का संकट खड़ा हो जाएगा। बीएसएफ में करीब दो साल नौकरी करने के बाद उन्हें कथित फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर सेवा से हटा दिया गया। दीपक जैसे एक-दो नहीं, बल्कि करीब 400 ट्रेड्समैन हैं, जिन्हें कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी से हटाए जाने की बात सामने आई है। दीपक के सामने अब अपनी बड़ी बहन की शादी कराने का संकट भी खड़ा हो गया है।

दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में करीब 400 लोगों की नौकरी जाने के मामले को लेकर अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रेस वार्ता की।

संगठन ने सरकार से इन कर्मचारियों की दोबारा बहाली की मांग की। संगठन ने कहा कि इन लोगों को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के मामले में नौकरी से हटाया गया है, जबकि उनका दावा है कि वे खुद धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं। संगठन ने सरकार से मामले पर पुनर्विचार करने और प्रभावित कर्मचारियों को राहत देने की मांग की।

संगठन ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 9 अक्टूबर से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।

बीएसएफ से निकाले गए दीपक ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि वह दिल्ली के रहने वाले हैं और 155वीं बटालियन में पंजाब के फिरोजपुर में ड्यूटी करते थे। उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया कि उनका सर्टिफिकेट असली नहीं है।

दीपक के मुताबिक, उनके साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि उन्हें यूट्यूब के माध्यम से एक संस्थान के बारे में जानकारी मिली थी, जहां से वैध सर्टिफिकेट देने की बात कही जा रही थी।

दीपक ने दावा किया कि मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हुई और गिरफ्तारी की गई, लेकिन कुछ दिनों बाद वे बाहर आ गए और अपना यूट्यूब चैनल चला रहे हैं। मामले को लेकर सरकार से भी गुहार लगाई गई है। हमारे साथ साइबर धोखाधड़ी हुई है। हमें बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बड़ी दीदी की शादी रुक गई है। नौकरी हमारे लिए बहुत बड़ी चीज थी। हमने बहुत मेहनत से यह नौकरी हासिल की थी।

अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा कि ट्रेड्समैन के तौर पर काम करने वाले कर्मचारी फोर्स के निचले पायदान पर सेवाएं दे रहे थे। 2023-24 में रसोइया, जलवाहक (वाटर कैरियर), और वेटर के लिए भर्ती निकाली गई। इस भर्ती के लिए जिस सर्टिफिकेट की जरूरत थी, वह इन बच्चों ने दिया। दो साल तक नौकरी की। लेकिन, वह दस्तावेज अब फर्जी निकला। असल में बच्चों ने गलती नहीं की है, गलती उनकी है, जिन्होंने सर्टिफिकेट दिया। बच्चों के साथ तो धोखाधड़ी हुई है।

उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि दीपावली का त्योहार आने वाला है और इन जवानों को दोबारा नौकरी पर रखा जाना चाहिए, ताकि 400 परिवारों में भी दीपावली का त्योहार मनाया जा सके।

एसोसिएशन के अध्यक्ष एचआर सिंह ने कहा कि यह बहुत विचित्र स्थिति है। इन लोगों ने लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षा और दस्तावेजों की जांच के बाद बड़ी मुश्किल से कुक, वाटर कैरियर और अन्य ट्रेड्समैन पदों पर नौकरी हासिल की थी। इन जवानों ने करीब दो साल तक काम किया और अपने काम में दक्ष भी हो गए। कुछ कर्मचारियों को उनके काम के लिए पुरस्कार भी मिले। ये लोग साइबर फ्रॉड के शिकार हुए हैं और दो साल की नौकरी के दौरान कई कर्मचारी उम्र सीमा के कारण अब दूसरी जगह नौकरी पाने की स्थिति में भी नहीं हैं। अगर एक-दो मामले होते तो बात अलग थी, लेकिन तकनीकी खामियों के आधार पर करीब 400 लोगों को नौकरी से हटाना गंभीर विषय है। सरकार और बीएसएफ को मानवीय दृष्टिकोण से इस मामले पर विचार करना चाहिए।

बीएसएफ से सेवानिवृत्त अधिकारी गजेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि प्रेस वार्ता करने का उद्देश्य बीएसएफ से निकाले गए 400 से अधिक जवानों की समस्याओं को सामने लाना है। ये जवान खाना बनाने, पानी उपलब्ध कराने और साफ-सफाई सहित विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते थे। उन्होंने करीब दो साल तक अपनी सेवाएं दीं, लेकिन इसके बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। जवानों को हटाए जाने की वजह उनके सर्टिफिकेट को बाद में फर्जी करार दिया जाना बताई गई है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सर्टिफिकेट को पहले सही माना गया था, तो बाद में उसे फर्जी पाए जाने पर जवानों को सीधे नौकरी से हटाने के बजाय पहले नोटिस दिया जाना चाहिए था और मामले की जांच कराई जानी चाहिए थी। इस पूरे मामले में संबंधित जवानों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था और जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम