बाबरी ढांचा और बाटला हाउस पर आंसू, कश्मीरी पंडितों व सिखों के नरसंहार पर चुप्पी क्यों: बृजलाल
लखनऊ, 8 नवंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं राज्यसभा सांसद बृजलाल ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और गांधी-नेहरू परिवार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बाबरी ढांचा विध्वंस, बाटला हाउस मुठभेड़, कश्मीरी पंडितों के पलायन और सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए।
बृजलाल ने आरोप लगाया कि गांधी-नेहरू परिवार की राजनीति मुस्लिम तुष्टिकरण पर आधारित रही है और इस परिवार ने हिंदुओं की पीड़ा की लगातार अनदेखी की है। बृजलाल ने कहा कि अयोध्या में बाबरी ढांचा विध्वंस के दृश्य देखकर सोनिया गांधी के रोने की बात कही जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि उस दौर में आज जैसी लाइव प्रसारण की सुविधाएं नहीं थीं, फिर सोनिया गांधी के तत्काल प्रतिक्रिया देने का दावा किस आधार पर किया जाता है।
उन्होंने इस प्रसंग को लेकर कांग्रेस और गांधी परिवार के राजनीतिक दृष्टिकोण पर सवाल खड़े किए। पूर्व डीजीपी ने दिल्ली में हुई बाटला हाउस मुठभेड़ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कार्रवाई में आतिफ अमीन और साजिद मारे गए थे, जबकि दिल्ली पुलिस के बहादुर इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा शहीद हो गए थे। उन्होंने कहा कि मुठभेड़ में मारे गए लोगों की तस्वीरें देखकर सोनिया गांधी के रोने का दावा कांग्रेस नेताओं की ओर से किया गया था, लेकिन शहीद इंस्पेक्टर की शहादत को लेकर वैसी संवेदना सामने नहीं आई।
बृजलाल ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने मुठभेड़ पर सवाल उठाकर पुलिस के मनोबल और शहीद अधिकारी के सम्मान को ठेस पहुंचाई।
बृजलाल ने वाराणसी के संकटमोचन मंदिर, दशाश्वमेध घाट, दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, हैदराबाद और देश के विभिन्न हिस्सों में हुए आतंकवादी हमलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों में बड़ी संख्या में निर्दोष भारतीयों की जान गई और अनेक परिवार उजड़ गए। उन्होंने सवाल उठाया कि आतंकवाद के कारण अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति कांग्रेस नेतृत्व ने वैसी संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखाई, जैसी बाटला हाउस प्रकरण में दिखाई जाने का दावा किया गया।
राज्यसभा सांसद ने कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों की लक्षित हत्याओं और बड़े पैमाने पर हुए पलायन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने टीका लाल टपलू, न्यायाधीश नीलकंठ गंजू, सतीश टिक्कू, लासा कौल और गिरिजा टिक्कू जैसे पीड़ितों का उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवाद ने कश्मीरी हिंदुओं को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर किया। उन्होंने गांधी-नेहरू परिवार से सवाल किया कि स्वयं को कश्मीरी मूल का बताने वाले इस परिवार ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों की पीड़ा को लेकर क्या संवेदनशीलता दिखाई।
बृजलाल ने असम में हुए नेल्ली नरसंहार और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं में हजारों निर्दोष लोगों की जान गई, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय संवेदनशील मुद्दों पर दोहरे मानदंड अपनाए।
पूर्व डीजीपी ने इंदिरा गांधी की काबुल यात्रा और बाबर की समाधि पर जाने का प्रसंग उठाते हुए गांधी-नेहरू परिवार की ऐतिहासिक एवं राजनीतिक प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति ने देश के बहुसंख्यक समाज की भावनाओं की उपेक्षा की है।
बृजलाल ने कहा कि देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी-नेहरू परिवार की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति राष्ट्रीय हितों के लिए घातक है। उन्होंने लोगों से कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास और उसके नेताओं के रवैये पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
--आईएएनएस
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