×

बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अनोखी भक्ति, 413 दिन से दंडवत यात्रा करते हुए काजीगुंड पहुंचा उत्तर प्रदेश का युवक

 

काजीगुंड, 30 जुलाई (आईएएनएस)। अमरनाथ यात्रा के बीच उत्तर प्रदेश के महोबा जिले का एक श्रद्धालु सुर्खियों में आया है। यह श्रद्धालु दंडवत यात्रा करते हुए जम्मू-कश्मीर के काजीगुंड पहुंचा है। उसकी इस यात्रा को 413 दिन हो चुके हैं।

श्रद्धालु सुनील पैदल चलने के बजाय थर्मोकोल की शीट पर पेट के बल लेटकर यह तीर्थयात्रा कर रहा है। उसकी अटूट श्रद्धा अमरनाथ यात्रा के रास्ते पर लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। जब वह काजीगुंड से गुजरा, तो कई तीर्थयात्री उसे देखने और उससे बात करने के लिए रुके। वहीं, सालाना यात्रा के लिए तैनात सुरक्षाकर्मी व्यस्त हाईवे पर उसकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उसके साथ चल रहे थे।

सुनील ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मैं अमरनाथ धाम के लिए दंडवत यात्रा कर रहा हूं। मेरी यात्रा को 413 दिन हो चुके हैं। देश में सुख शांति बनी रहे, बाबा बर्फानी के पास यही प्रार्थना लेकर जा रहा हूं।"

सुनील ने सुरक्षा को लेकर कहा, "मैं अकेले ही यात्रा को कर रहा हूं। सुरक्षाबल के जवान सुरक्षित यात्रा करा रहे हैं।"

गौरतलब है कि बाबा बर्फानी की अमरनाथ यात्रा के चलते देशभर से श्रद्धालु लगातार जम्मू-कश्मीर पहुंच रहे हैं। मात्र 26 दिनों के भीतर श्रद्धालुओं की संख्या 4.15 लाख के पार पहुंच चुकी है। श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा हेलीकॉप्टर (हेली) हॉपिंग सेवा भी शुरू की गई है, जिसके माध्यम से श्रद्धालु धार्मिक स्थलों के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों का भी भ्रमण कर सकते हैं।

अमरनाथ गुफा मंदिर में बर्फ से बनी एक संरचना है, जो चंद्रमा की कलाओं के साथ घटती-बढ़ती रहती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि बर्फ की यह संरचना भगवान शिव की अलौकिक शक्तियों का प्रतीक है। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए श्रद्धालु दो रास्तों से यात्रा करते हैं। वे पारंपरिक नुनवान (पहलगाम) रूट (47 किमी लंबा) का इस्तेमाल करते हैं या छोटे बालटाल बेस कैंप रूट (14 किमी लंबा) से जाते हैं।

बालटाल रूट का इस्तेमाल करने वाले श्रद्धालु पवित्र गुफा के अंदर दर्शन करने के बाद उसी दिन बेस कैंप लौट आते हैं। वहीं, पहलगाम रूट का इस्तेमाल करने वालों को पवित्र गुफा तक पहुंचने में चार दिन लगते हैं।

--आईएएनएस

डीसीएच/