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बात-बात पर आता है गुस्सा? भौंरे जैसी आवाज वाला ये प्राणायाम करेगा मन शांत

 

नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। काम का दबाव, लगातार भागदौड़, नींद की कमी और छोटी-छोटी बातों को लेकर बढ़ती चिंता का असर हमारे मूड पर भी पड़ता है। कई बार ऐसा होता है कि किसी मामूली बात पर भी गुस्सा अचानक बढ़ जाता है। बाद में जब मन शांत होता है तो लगता है कि इतनी छोटी बात पर इतना गुस्सा करने की जरूरत ही नहीं थी। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो भ्रामरी प्राणायाम आपके लिए मददगार हो सकती है।

भ्रामरी प्राणायाम में सांस छोड़ते समय भौंरे जैसी गुनगुनाहट की आवाज निकाली जाती है। इसी वजह से इसे भ्रामरी नाम दिया गया है। इसका अभ्यास करते समय व्यक्ति अपना ध्यान सांस और आवाज पर केंद्रित करता है। इससे मन को कुछ देर के लिए रोजमर्रा की भागदौड़ और परेशान करने वाले विचारों से हटाकर भीतर की ओर लाने में मदद मिल सकती है।

अगर किसी बात पर बहुत गुस्सा आ रहा हो, तो तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ देर शांत बैठकर गहरी सांस लेना और भ्रामरी का अभ्यास करना मन को स्थिर करने में सहायक हो सकता है। इससे व्यक्ति को अपनी भावनाओं पर थोड़ा ठहरकर सोचने का मौका भी मिलता है। भ्रामरी प्राणायाम में धीमी और नियंत्रित सांस पर ध्यान दिया जाता है। इससे शरीर को रिलैक्स करने और मन को शांत करने में मदद मिल सकती है।

इसके लिए किसी शांत और आरामदायक जगह पर सुखासन की स्थिति में बैठ जाएं। कमर और गर्दन सीधी रखें। दोनों अंगूठों से कान बंद करें, पहली उंगली माथे पर तथा बाकी उंगलियां आंखों पर रखें। नाक से लंबा गहरा श्वास लें और भौंरे की तरह 'हम्म्...' की गूंज करते हुए धीरे-धीरे श्वास बाहर छोड़ें। आवाज और सांस पर अपना ध्यान रखें। इसे अपनी क्षमता के अनुसार कुछ बार दोहराया जा सकता है।

नियमित योग दिनचर्या में इसे शामिल करने से तनाव और चिंता को कम करने, मन को शांत रखने तथा एकाग्रता और विचारों में स्पष्टता लाने में मदद मिल सकती है। कुछ लोगों को यह अभ्यास मानसिक रूप से रिलैक्स महसूस कराने वाला भी लगता है।

हालांकि, इसे करते समय शरीर पर जोर नहीं देना चाहिए। अगर नाक या कान में किसी तरह का संक्रमण या परेशानी है, तो भ्रामरी प्राणायाम न करें। किसी स्वास्थ्य समस्या या अभ्यास को लेकर असमंजस होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस