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बाढ़ प्रभावित इलाकों में सेना का अभियान, 931 नागरिकों व 330 पशुओं का उपचार

 

नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय सेना, असम व पूर्वोत्तर के कई क्षेत्रों में आई बाढ़ के बीच ‘उम्मीद का प्रतीक’ बनकर सामने आई है। यहां बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सेना ने 931 लोगों और 330 पशुधन को बाढ़ व उसके कारण उत्पन्न हालात से राहत प्रदान की है। बाढ़ के पानी के बीच आर्मी की चिकित्सा टीमें ऐसे स्थानों तक पहुंचीं, जहां फिलहाल किसी का भी पहुंचना मुश्किल था।

यहां बाढ़ में फंसे पशुओं के लिए सेना ने अलग से विशेष मेडिकल कैंप लगाए। यहां बाढ़ के कारण मुश्किल परिस्थितियों से सेना ने एक ओर लोगों को सुरक्षित निकाला, वहीं सेना की चिकित्सा टीमों ने विभिन्न प्रभावित गांवों तक पहुंचकर 931 नागरिकों की आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रदान की हैं। यहां सेना द्वारा नि:शुल्क दवाइयां भी उपलब्ध कराई गईं। कई प्रभावित परिवारों के लिए यह शिविर ऐसे समय में पहुंचा, जब बाढ़ के कारण सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो गया था।

बाढ़ का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं रहा। बड़ी संख्या में पशु भी इससे प्रभावित हुए। इसे देखते हुए सेना ने शिविर में पशु चिकित्सा सुविधा की भी व्यवस्था की। अभियान के दौरान 330 से अधिक बाढ़ प्रभावित पशुओं की जांच और उपचार किया गया।

सेना के मुताबिक, 16 से 18 अगस्त तक असम के बरहोइटिंग, चिंतामणि घर और निमाईजान में विशेष मेडिकल अभियान आयोजित किए गए। इसमें स्थानीय एनसीसी कैडेटों और गैर-सरकारी संगठनों ने भी सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। ऐसे में बाढ़ ने जहां जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, वहीं संकट की इस घड़ी में भारतीय सेना लोगों के लिए उम्मीद और मदद का सहारा बनकर सामने आई है।

स्पीयर कोर के तहत सेना की इकाइयों ने शिवसागर जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों में व्यापक चिकित्सा एवं पशु चिकित्सा शिविर लगाकर सैकड़ों लोगों और उनके पशुओं तक जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाईं। इस राहत अभियान की खास बात यह रही कि सेना के साथ स्थानीय एनसीसी कैडेटों और गैर-सरकारी संगठनों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। संयुक्त प्रयासों से जरूरतमंद लोगों और पशुओं तक चिकित्सा सहायता पहुंचाई गई।

भारतीय सेना का यह अभियान दिखाता है कि प्राकृतिक आपदा के समय उसकी भूमिका केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह आम नागरिकों के साथ खड़ी होकर राहत और मानवीय सहायता में भी अग्रणी भूमिका निभाती है। बाढ़ के पानी के बीच पहुंची चिकित्सा सहायता ने प्रभावित परिवारों के लिए राहत के साथ यह भरोसा भी मजबूत किया कि मुश्किल वक्त में भारतीय सेना उनके साथ है।

बता दें कि बीते माह के अंत में थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति की व्यापक समीक्षा की थी। वह 28 और 29 जुलाई को पूर्वी थिएटर के सैन्य गठन क्षेत्रों के दो दिवसीय दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने पूर्वोत्तर की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, सैन्य तैयारियों और शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों की व्यापक समीक्षा की। तब सेना प्रमुख ने पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों से बाढ़ राहत अभियानों की प्रगति की भी जानकारी ली थी।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीकेपी