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आयुर्वेद नवाचार को मजबूती: एआईआईए-आईसीएआईएनई ने राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के साथ किया एमओयू

 

नई दिल्ली/जोधपुर, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान – आयुर्वेद नवाचार एवं उद्यमिता के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर (एआईआईए–आईसीएआईएनई) ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय (डीएसआरआरएयू), जोधपुर के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस साझेदारी का उद्देश्य आयुर्वेद शिक्षा में नवाचार, अनुसंधान, तकनीकी उन्नति और उद्यमिता को बढ़ावा देकर एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित करना है। समझौता ज्ञापन पर 27 अप्रैल 2026 को जोधपुर में डीएसआरआरएयू परिसर में हस्ताक्षर किए गए। एआईआईए–आईसीएआईएनई की ओर से संस्थान के निदेशक प्रोफेसर (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति और डीएसआरआरएयू की ओर से कुलपति प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ला ने इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। समारोह में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्य, शोधकर्ता, स्नातकोत्तर छात्र और शोधार्थी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में प्रोफेसर प्रदीप कुमार प्रजापति ने कहा कि यह समझौता आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने और पारंपरिक ज्ञान को साक्ष्य-आधारित और बाजार-उन्मुख नवाचारों में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि एआईआईए–आईसीएआईएनई देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में आयुर्वेद आधारित नवाचार और उद्यमिता के लिए सशक्त इकोसिस्टम विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

डीएसआरआरएयू के कुलपति प्रोफेसर गोविंद सहाय शुक्ला ने कहा कि यह सहयोग विश्वविद्यालय के छात्रों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों के लिए नवाचार एवं उद्यमिता के नए अवसर खोलेगा। इससे संस्थान के विजन 'वैश्विक कल्याण के लिए परंपरा और नवाचार का समन्वय' को मजबूती मिलेगी।एआईआईए–आईसीएआईएनई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुजीत एरानेझाथ ने कहा कि इस साझेदारी के तहत छात्रों और शोधकर्ताओं को मेंटरशिप, प्रशिक्षण, क्षमता विकास, आइडिया-पिचिंग कैंप, उद्यमिता कार्यशालाएं और उद्योग से जुड़े हितधारकों के साथ संवाद के अवसर प्रदान किए जाएंगे।

समझौता ज्ञापन की अवधि प्रारंभ में तीन वर्ष निर्धारित की गई है। इसके अंतर्गत संयुक्त विचार शिविर, नवाचार चुनौतियां और उद्योग-शैक्षणिक संस्थान संवाद भी आयोजित किए जाएंगे। इस एमओयू से आयुष मंत्रालय के नवाचार, उद्यमिता और क्षेत्रीय विकास संबंधी उद्देश्यों को बल मिलने की उम्मीद है। साथ ही आयुर्वेद-प्रेरित उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक संदर्भ में मजबूती प्रदान होगी।

--आईएएनएस

एससीएच