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अयोध्या: राम मंदिर प्रायश्चित अनुष्ठान पर साधु-संतों की प्रतिक्रिया, बोले-मंदिर आज भी पवित्र

 

अयोध्या, 17 जुलाई (आईएएनएस)। राम मंदिर परिसर में आयोजित किए जा रहे प्रायश्चित अनुष्ठान को लेकर अयोध्या के साधु-संतों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ संतों ने अनुष्ठान के उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं तो कुछ ने इसे उचित बताया है। वहीं कई संतों ने राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले और प्रायश्चित अनुष्ठान को लेकर अपनी-अपनी राय भी व्यक्त की है।

आईएएनएस से बातचीत में आर्य संत वरुण दास जी महाराज ने कहा कि पहले यह पता चलना चाहिए कि आखिर प्रायश्चित अनुष्ठान आयोजित क्यों हो रहा है? जब कोई बड़ा अनुष्ठान होना होता है तो उससे पहले भूतशुद्धि और आत्मशुद्धि के लिए प्रायश्चित अनुष्ठान किया जाता है। इस अनुष्ठान का उद्देश्य क्या है और यह किसलिए आयोजित किया जा रहा है?

उन्होंने कहा कि अगर यह राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर किया जा रहा है तो राम मंदिर में कोई चोरी नहीं हुई है। बैंककर्मी और कर्मचारी जहां नोटों की गणना करते हैं, चोरी वहां से हुई है और यह जगह मंदिर परिसर से कुछ दूरी पर है। मंदिर आज भी पवित्र है। मुझे इस अनुष्ठान की जानकारी मिली, लेकिन इस तरह का कोई भी अनुष्ठान दस दिन के लिए नहीं होता, बल्कि पांच, सात, नौ और ग्यारह दिन के लिए आयोजित किया जाता है।

उन्होंने कहा कि अगर चढ़ावे में हुई हेराफेरी की वजह से ट्रस्ट के लिए अनुष्ठान किया जा रहा है तो यह अच्छी बात है, क्योंकि मानव जीवन में गलतियां होती रहती हैं और इसके लिए क्षमा-याचना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस अनुष्ठान का यजमान कौन है, यह भी स्पष्ट होना चाहिए। बहुत-सी बातें स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पुजारी को लेकर कर्मचारियों की भावना होगी तो यह अनुष्ठान सफल नहीं होगा।

वहीं, महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने कहा कि क्या पूजा करने और पछतावा करने से रामलला क्षमा कर देंगे? लोगों के चढ़ावे की चोरी किए जाने से कितना पाप हुआ है। इस पाप के बाद कोई कुछ भी करे, लेकिन माफी नहीं है। पाप करने वाला व्यक्ति कितना भी पछतावा करे, लेकिन वह मान्य नहीं होता। मनुष्य जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल मिलता है।

उन्होंने कहा कि किसी का गला काटकर कोई भगवान से क्षमा मांगे तो क्या उसे क्षमा मिल जाएगी? करोड़ों राम भक्तों का गला काटने का काम किया गया है, इसीलिए विपक्ष को मुद्दा मिल गया है। अखिलेश यादव को भी मुद्दा मिल गया है। क्या वह हमारे साथ मथुरा चलने के लिए तैयार हैं?

महंत सीताराम दास महाराज का कहना है कि किसी भी अनुष्ठान से पहले प्रायश्चित अनुष्ठान किया जाता है। अगर किसी भी तरह का पाप हुआ होगा तो उससे छुटकारा मिल जाएगा। जो हो रहा है, ठीक हो रहा है। मुझे विश्वास है कि यह जनकल्याण की भावना से हो रहा है। सबके मंगल की कामना से यह अनुष्ठान हो रहा है, यह सफल होगा।

तपस्वी छावनी के जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने कहा कि अनुष्ठान होना अच्छी बात है, लेकिन प्रायश्चित अनुष्ठान करना उपहास की तरह है। भगवान राम के मंदिर में इस अनुष्ठान की क्या जरूरत है? भगवान राम के पास जाते ही सारे पाप और कर्मों का प्रायश्चित हो जाता है। भगवान कहते हैं कि जो शरण में आ गया है, उसका मरण नहीं होता।

उन्होंने कहा कि चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए सावधानी की जरूरत है। यह कोई बड़ी घटना नहीं है, लेकिन हजारों की सैलरी पाने वाले गरीब लोगों के अंदर लालच आ गया होगा। यह कोई नई बात नहीं है। जो अधर्मी लोग हैं, वही लोग हल्ला मचा रहे हैं। उन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। सनातन धर्म के विरोधियों द्वारा ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि अयोध्या और राम मंदिर में सिर्फ चोर ही भरे पड़े हैं। यह बड़ा षड्यंत्र है।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी