अयोध्या में रामकोट परिक्रमा को एक साल पूरा, हजारों श्रद्धालुओं ने की अंतर्गृही परिक्रमा
अयोध्या, 21 अगस्त (आईएएनएस)। रामनगरी अयोध्या में रोज होने वाली रामकोट परिक्रमा को शुक्रवार को एक साल पूरा हो गया है। इस अवसर पर अयोध्या में भव्य आयोजन हुआ, जिसमें साधु-संतों के साथ हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। सुबह 5:30 बजे शुरू हुई इस विशेष परिक्रमा में राम भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
राम मंदिर के निर्माण के बाद शुरू की गई यह परिक्रमा अब अयोध्या की दिनचर्या का हिस्सा बन गई है। इसे प्राचीन काल में 'अंतर्गृही परिक्रमा' के नाम से जाना जाता था। मान्यता है कि साधु-संत और तपस्वी सदियों से इस परिक्रमा को करते आ रहे हैं। राम मंदिर ट्रस्ट ने इसे फिर से नियमित रूप से शुरू किया है।
रोजाना सुबह होने वाली इस परिक्रमा में राम लला मंदिर और हनुमानगढ़ी समेत रामकोट क्षेत्र के एक दर्जन से ज्यादा प्रमुख मंदिरों को शामिल किया जाता है। परिक्रमा में शामिल होने के बाद श्रद्धालु भगवान राम के दर्शन करते हैं। बताया जा रहा है कि हर दिन लगभग 5,000 श्रद्धालु इस परिक्रमा में हिस्सा लेते हैं। एक साल पूरा होने पर आज श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना ज्यादा रही।
राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा ने इस अवसर पर कहा, "साधु-संत और तपस्वी प्राचीन काल से ही रामकोट परिक्रमा को 'अंतर्गृही परिक्रमा' के तौर पर करते आ रहे हैं। राम मंदिर के निर्माण के बाद से रोजाना रामकोट परिक्रमा शुरू की गई। संत समाज और श्रद्धालु रोजाना परिक्रमा करने के बाद भगवान राम के दर्शन करते हैं। आज एक वर्ष पूरे होने पर इस परिक्रमा में आए सभी का स्वागत है। ऐसे ही आगे भी परिक्रमा कर दर्शन करें।"
वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति के सदस्य और राम वल्लभ कुंज के महंत राजकुमार दास ने कहा, "आज ठाकुर श्री राम लल्ला, श्री हनुमान जी और रामकोट परिक्रमा क्षेत्र में मौजूद एक दर्जन से ज़्यादा अन्य मंदिरों की परिक्रमा में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। साधु-संत, महंत, आचार्य और हजारों श्रद्धालु एक साथ मिलकर परिक्रमा करने के लिए जुटे। ये रोजाना होती है। इसमें करीब एक घंटे का समय लगता है।"
उन्होंने आगे कहा कि जो श्रद्धालु अयोध्या आते हैं, उन्हें इस परिक्रमा में जरूर शामिल होना चाहिए। अगर श्रद्धालु बड़ी पंचकोसी और 14 कोसी परिक्रमा नहीं कर सकते तो उन्हें कम से कम अंतर्गृही यानी रामकोट परिक्रमा जरूर करनी चाहिए।
--आईएएनएस
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