×

अयातुल्ला अली खामेनेई को चार महीने बाद किया जाएगा सुपुर्द-ए-खाक, वीडियो में जाने मशहद में होगी अंतिम विदाई

 

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को उनकी मौत के लगभग चार महीने बाद सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप उन्हें पवित्र शहर मशहद में शिया मुस्लिमों के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक इमाम रजा की दरगाह के निकट दफनाया जाएगा।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/oZZkMDnVVl4?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/oZZkMDnVVl4/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

21 जून के आसपास हो सकता है अंतिम संस्कार

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुताबिक, खामेनेई को 21 जून के आसपास अंतिम विदाई दी जा सकती है। अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रमों की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और देशभर से श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

28 फरवरी को हुई थी मौत

रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी को तेहरान स्थित उनके आवास पर हुए अमेरिका-इजराइल के कथित हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे ईरान में शोक की लहर फैल गई थी और क्षेत्रीय राजनीति में भी इसका व्यापक असर देखने को मिला।

मशहद में दफनाए जाने की थी अंतिम इच्छा

खामेनेई ने अपनी अंतिम इच्छा में कहा था कि उन्हें मशहद शहर में इमाम रजा की पवित्र दरगाह परिसर के पास दफनाया जाए। इमाम रजा का दरगाह शिया मुसलमानों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

अंतिम संस्कार में 2 करोड़ लोगों के पहुंचने की उम्मीद

ईरानी अधिकारियों का अनुमान है कि तेहरान, कुम और मशहद में आयोजित होने वाले अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। इसे ईरान के इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में से एक माना जा रहा है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

संभावित भारी भीड़ को देखतेहुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी शुरू कर दी है। प्रमुख शहरों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे और अंतिम संस्कार मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।अयातुल्ला अली खामेनेई दशकों तक ईरान की राजनीति और धार्मिक नेतृत्व के केंद्र में रहे। उनकी अंतिम विदाई को लेकर पूरे देश में भावनात्मक माहौल बना हुआ है और लाखों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने की तैयारी कर रहे हैं।