मुंबई में मराठी नियम के विरोध में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों की 3 दिन की हड़ताल, वीडियो में बोले- परिवार पालें या भाषा सीखें?
मुंबई में मराठी भाषा को लेकर लागू किए जा रहे नियम के विरोध में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों ने तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है। गैर-मराठी भाषी ड्राइवरों का कहना है कि वे मराठी सीखने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि नियम लागू करने के दौरान जुर्माने और लाइसेंस या बैज निलंबित होने का डर दिखाया जा रहा है। हड़ताल के कारण मुंबई के कई इलाकों में ऑटो की उपलब्धता प्रभावित हुई और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
ड्राइवरों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी चिंता उम्र और आर्थिक स्थिति को लेकर है। कई उम्रदराज चालकों ने कहा कि उन्होंने ज्यादा पढ़ाई नहीं की है और वर्षों से ऑटो चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनका सवाल है कि 55 से 60 साल की उम्र में उनके सामने परिवार चलाने की जिम्मेदारी है या फिर नई भाषा सीखने की चुनौती। उनका कहना है कि अचानक भाषा की परीक्षा और कार्रवाई का दबाव उनके लिए मुश्किल पैदा कर रहा है।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की जानकारी को लेकर जांच शुरू की गई है। परिवहन विभाग की टीमें चालकों की भाषा संबंधी क्षमता की जांच कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन चालकों को मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं है, उन्हें नोटिस दिया जा रहा है और उन्हें भाषा सुधारने का मौका देने की व्यवस्था की गई है।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा था कि ड्राइवरों को पहले नोटिस देकर मराठी सीखने के लिए समय दिया जाएगा। इसके बाद भी निर्धारित आवश्यकता पूरी नहीं करने पर लाइसेंस या बैज के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य गैर-मराठी भाषी लोगों को परेशान करना नहीं, बल्कि यात्रियों और सार्वजनिक परिवहन चालकों के बीच बुनियादी संवाद सुनिश्चित करना है।
वहीं, प्रदर्शन कर रहे ड्राइवरों का दावा है कि कई लोग मराठी सीखने की कोशिश कर रहे हैं और टूटी-फूटी मराठी भी बोल रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें नियम पूरा करने के लिए पर्याप्त समय देने के बजाय जुर्माना लगाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का सवाल है कि यदि उन पर 15 से 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है तो वे इतनी बड़ी रकम कैसे भर पाएंगे।
ड्राइवरों की हड़ताल के चलते मुंबई के कुछ हिस्सों में यात्रियों को ऑटो और टैक्सी की कमी का सामना करना पड़ा। सोमवार को सुबह के व्यस्त समय में कई यात्रियों को रेलवे स्टेशनों और अन्य स्थानों तक पहुंचने में परेशानी हुई। कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर वाहन खड़े कर विरोध भी जताया।
इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि सरकार ड्राइवरों को मराठी का विशेषज्ञ बनाने की कोशिश नहीं कर रही है। सरकार की ओर से बुनियादी मराठी ज्ञान पर जोर दिया जा रहा है।
अब ड्राइवर संगठन अधिक समय, कम सजा और नियमों को लागू करने से पहले पर्याप्त प्रशिक्षण की मांग कर रहे हैं। वहीं सरकार अपने भाषा संबंधी नियम पर कायम है। ऐसे में आने वाले दिनों में हड़ताल और मराठी भाषा को लेकर विवाद के और बढ़ने की संभावना है।