ऑस्ट्रेलियाई सेना के उप प्रमुख ने थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ से की मुलाकात
नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलियाई सेना के उप प्रमुख मेजर जनरल क्रिस स्मिथ ने थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ से मुलाकात की है। बुधवार को यह मुलाकात नई दिल्ली में हुई। यहां दोनों सैन्य अधिकारियों ने डॉ बदलते भू-रणनीतिक माहौल पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
मुलाकात के दौरान दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को और व्यापक बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। इस चर्चा में दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, सैन्य स्तर पर संपर्क बढ़ाने, संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
बातचीत में इस बात पर भी चर्चा हुई कि दोनों सेनाएं आपसी सहयोग के मौजूदा क्षेत्रों को किस तरह और मजबूत कर सकती हैं। संयुक्त प्रशिक्षण और सैन्य गतिविधियों के जरिए दोनों सेनाओं की कार्यप्रणाली को एक-दूसरे के साथ और बेहतर तरीके से जोड़ने पर जोर दिया गया।
भारतीय सेना के अनुसार, इस मुलाकात ने दोनों सेनाओं के बीच संस्थागत संबंधों को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दोहराया। साथ ही, आपसी विश्वास बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता के लिए साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी सामने आई। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हाल के वर्षों में रक्षा और सैन्य सहयोग लगातार बढ़ा है। दोनों देशों की सेनाएं नियमित रूप से विभिन्न स्तरों पर बातचीत, संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण गतिविधियों में हिस्सा लेती हैं। ऐसे संवादों से दोनों सेनाओं को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और क्षमताओं को समझने तथा आपसी तालमेल को मजबूत करने का अवसर मिलता है।
वहीं ऑस्ट्रेलिया का एक प्रतिनिधिमंडल भी भारत दौरे पर है। प्रतिनिधिमंडल ने सामरिक और समकालीन सुरक्षा मुद्दों पर भारत के साथ वार्ता की है। दिल्ली में भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं के बीच यह 13वीं आर्मी टू आर्मी स्टाफ वार्ता है। वार्ता का 28 से 30 सितंबर तक चली। यहां दोनों देशों की सेनाओं के बीच मजबूत साझेदारी और आपसी विश्वास को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
जनरल धीरज सेठ ने इस बीच बुधवार को सेवानिवृत्त हो रहे अधिकारियों की अद्वितीय एवं निस्वार्थ सेवा की सराहना की और उन्हें विदाई दी। सेना के कहा कि मातृभूमि की रक्षा में समर्पित ये अधिकारी अब अपने अनुभव, अनुशासन और मूल्य आधारित नेतृत्व के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की नई दिशाओं को प्रज्वलित करते रहेंगे। भारत उनके योगदान का सदैव ऋणी रहेगा।
--आईएएनएस
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