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25 की उम्र में 70 हत्याओं का खौफ, कान के पास हथौड़ा मारता था ‘कनपटीमार’, वीडियो में denkhe ऐसे पकड़ा गया था राजस्थान का खूंखार किलर

 

राजस्थान की राजधानी जयपुर की अपराध की पुरानी कहानियों में एक नाम ऐसा भी रहा है, जिसने 1970 के दशक में लोगों के बीच खौफ पैदा कर दिया था। यह नाम था कम्पाटीमार शंकरिया, जिसे लोग ‘कनपटीमार’ के नाम से जानते थे। पुलिस रिकॉर्ड और उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, शंकरिया ने 1977-78 के दौरान करीब 70 लोगों की हत्या करने की बात कबूल की थी। उसके अपराध का तरीका इतना अलग था कि लोगों ने उसे ‘कनपटीमार’ नाम दे दिया।

कान के पास हथौड़े से करता था हमला

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शंकरिया के अपराध का सबसे चर्चित पहलू उसका हत्या करने का तरीका था। रिपोर्टों के मुताबिक वह अपने शिकार के कान के नीचे कनपटी के पास हथौड़े से वार करता था। अचानक किए गए इस हमले में पीड़ित को संभलने का मौका नहीं मिलता था। इसी वजह से उसका नाम ‘कनपटीमार’ पड़ गया।

1977 और 1978 के दौरान राजस्थान में एक के बाद एक हत्याओं की खबरों ने लोगों में डर पैदा कर दिया था। उस दौर में संचार के साधन आज की तरह तेज नहीं थे। ऐसे में घटनाओं की जानकारी अखबारों और रेडियो के जरिए लोगों तक पहुंचती थी। शंकरिया की वारदातों की चर्चा धीरे-धीरे पूरे इलाके में फैल गई।

महज 20 के दशक में बन गया खूंखार अपराधी

उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार शंकरिया का जन्म 1952 में जयपुर में हुआ था। यानी जिस समय उसने अपराध की दुनिया में अपना खौफ कायम किया, उस समय उसकी उम्र करीब 20 से 25 साल के बीच थी। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी संख्या में हत्याओं से जुड़ा उसका नाम अपराध जगत के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो गया।

रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ शंकरिया तक पहुंच बनी और उसे 1978 में गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसने कई हत्याओं के बारे में कबूलनामे किए। हालांकि, उसके द्वारा बताई गई हत्याओं की संख्या और विभिन्न रिकॉर्डों में दर्ज मामलों के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।

अदालत ने सुनाई मौत की सजा

गिरफ्तारी के बाद शंकरिया के खिलाफ हत्या के मामले चले। उसे दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई। इसके बाद 16 मई 1979 को जयपुर में उसे फांसी दे दी गई। उस समय उसकी उम्र करीब 27 साल थी।

कनपटीमार शंकरिया की कहानी आज भी राजस्थान के सबसे चर्चित पुराने अपराध मामलों में गिनी जाती है। उसके नाम से जुड़ी ‘70 हत्याओं’ की संख्या विभिन्न मीडिया और संदर्भ स्रोतों में मिलती है, जबकि उसके खिलाफ साबित किए गए मामलों और कथित कबूलनामे को अलग-अलग समझना जरूरी है।

इस मामले की सबसे भयावह बात केवल हत्याओं की संख्या नहीं, बल्कि कम उम्र में अपराध का ऐसा सिलसिला और हत्या का एक जैसा तरीका था। यही वजह है कि दशकों बाद भी ‘कनपटीमार’ नाम राजस्थान के पुराने अपराध इतिहास में लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।