असम से केरल तक कांग्रेस के टिकट पर मुस्लिम विधायकों की बढ़ी हिस्सेदारी
नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। हालिया चुनावी नतीजों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कुछ विश्लेषणों और दावों में कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी की जीत में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का अनुपात काफी अधिक रहा है, जिसको लेकर सियासी बहस छिड़ गई है।
असम की बात करें तो कांग्रेस ने कुल 19 सीटें जीतीं, जिनमें से 18 विधायक मुस्लिम समुदाय से हैं। पार्टी ने 20 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 18 जीतने में सफल रहे। वहीं, 79 गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों में से केवल 1 ही जीत पाया। कांग्रेस की सहयोगी पार्टी रायजोर दल ने 2 सीटें जीतीं, जिनमें एक मुस्लिम उम्मीदवार है, जबकि दूसरे विधायक अखिल गोगोई हैं, जिन पर एनआईए द्वारा माओवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में जांच चल रही है।
केरल में 140 सदस्यीय विधानसभा में 35 मुस्लिम विधायक चुने गए हैं। इनमें से 30 विधायक कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन से हैं। इनमें 8 विधायक कांग्रेस के हैं, जबकि सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सभी 22 विधायक मुस्लिम समुदाय से हैं।
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की और दोनों ही मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से मुस्लिम उम्मीदवार रहे। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस ने यहां 63 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया, जो तृणमूल कांग्रेस (47 मुस्लिम उम्मीदवार) से अधिक है तमिलनाडु में कांग्रेस ने 2 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा, जिनमें से 1 ने जीत हासिल की।
इन आंकड़ों के आधार पर कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि केरल और असम में कांग्रेस और उसके सहयोगियों द्वारा उतारे गए मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत का प्रतिशत 80 प्रतिशत से अधिक रहा है। इसी आधार पर यह तर्क दिया जा रहा है कि कांग्रेस टिकट पर मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत की संभावना अधिक देखी गई है, हालांकि इसे लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस जारी है और अलग-अलग पक्ष अपनी-अपनी व्याख्या पेश कर रहे हैं।
--आईएएनएस
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