असम के पूर्व कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य को आर्मी चीफ ने किया सम्मानित
तेजपुर, 22 जून (आईएएनएस)। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने असम के प्रतिष्ठित पूर्व सैन्य अधिकारी कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य (सेवानिवृत्त) को शनिवार को तेजपुर में आयोजित एक आधिकारिक समारोह में चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन कार्ड और मेडल से सम्मानित किया।
सम्मान प्रदान करते हुए सेना प्रमुख ने कर्नल भट्टाचार्य की देश सेवा की सराहना की और कहा कि उन्होंने अपने उत्कृष्ट सैन्य करियर के दौरान और उसके बाद भी कर्तव्य, समर्पण, ईमानदारी और पेशेवर उत्कृष्टता के उच्चतम आदर्शों को बनाए रखा है।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी कर्नल भट्टाचार्य ने देश के विकास और प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और अपने व्यवहार व सेवा से उन्होंने सैनिकों और आम नागरिकों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य ने भारतीय सेना में 33 वर्षों से अधिक समय तक सेवा दी है। वे इस बात के लिए भी जाने जाते हैं कि उन्होंने यूपीएससी एनडीए परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त करने वाले असम के पहले व्यक्ति होने का गौरव हासिल किया।
अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने पाकिस्तान और चीन सीमा क्षेत्रों में सेवा दी और पंजाब तथा जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक (आतंकवाद विरोधी अभियान) तथा ऑपरेशन पराक्रम में भी भाग लिया।
वे प्रतिष्ठित सीनियर ऑफिसर्स कोर्स में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले भी रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन में डायरेक्टर के रूप में भी कार्य किया।
सेना से रिटायर होने के बाद भी कर्नल भट्टाचार्य समाज सेवा में सक्रिय हैं। वे वर्तमान में गुवाहाटी हाई कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं और आर्य विद्या पीठ कॉलेज, गुवाहाटी में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में भी जुड़े हैं।
उन्होंने दिव्य शंकर फाउंडेशन की स्थापना की है, जो विशेष रूप से असम और पूर्वोत्तर के छात्रों को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण देता है। उनके प्रयासों से कई युवा रक्षा सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रेरित हुए हैं।
उन्हें हाल ही में सर्वोत्तम साधना पुरस्कार 2026 से भी सम्मानित किया गया था।
कर्नल भट्टाचार्य, असम के प्रसिद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता, विधिवेत्ता और साहित्यकार स्वर्गीय गौरी शंकर भट्टाचार्य के सबसे छोटे पुत्र हैं। सेना प्रमुख द्वारा दिया गया यह सम्मान उनके राष्ट्र, सेना और समाज के प्रति आजीवन योगदान का प्रतीक माना जा रहा है और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
--आईएएनएस
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