असम के मुख्यमंत्री ने चाय बागान श्रमिकों के लिए वित्तीय सहायता योजना शुरू की
गुवाहाटी, 25 जनवरी (आईएएनएस)। असम सरकार ने रविवार को चाय बागान श्रमिकों के कल्याण पर अपनी केंद्रित प्रतिबद्धता को दोहराया। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रविवार को तिनसुकिया जिले के डूमडूमा में 'मुख्य मंत्रिर एति कोलि दुति पात' योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत राज्य भर के छह लाख से अधिक श्रमिकों को एकमुश्त 5,000 रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने इस योजना को असम के 200 साल पुराने चाय उद्योग में चाय बागान श्रमिकों के अमूल्य योगदान को श्रद्धांजलि बताया है। इस योजना के तहत 27 जिलों और 73 विधानसभा क्षेत्रों में फैले 836 चाय बागानों में कार्यरत 6,03,927 स्थायी और अस्थायी श्रमिकों को 300 करोड़ रुपए से अधिक की राशि वितरित की जाएगी।
शुभारंभ के अवसर पर बोलते हुए सरमा ने कहा कि यह पहल वर्तमान सरकार के एक और महत्वपूर्ण चुनावी वादे को पूरा करती है और चाय बागान श्रमिकों और आदिवासी समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
उन्होंने आगे कहा कि योजना के सफल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया अपने दिन की शुरुआत असम की चाय के एक कप से करती है, लेकिन खेतों में मेहनत करने वाले मजदूर अक्सर अनदेखे रह जाते हैं। जिस प्रकार हमें असम की चाय पर गर्व है, उसी प्रकार हमें चाय बागान श्रमिकों पर भी गर्व होना चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य के चाय उद्योग ने ब्रिटिश काल में अपनी स्थापना के बाद से 200 वर्ष पूरे कर लिए हैं।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत, मुख्यमंत्री ने चाय बागान श्रमिकों के लिए बाल देखभाल, स्वास्थ्य, सम्मान और सुरक्षित कार्य परिस्थितियों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मोबाइल क्रेच और मोबाइल शौचालय सेवाओं का भी उद्घाटन किया।
कल्याणकारी उपायों की एक श्रृंखला पर प्रकाश डालते हुए सरमा ने कहा कि सरकार ने तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नौकरियों में ओबीसी श्रेणी के तहत चाय बागान जनजातियों और स्वदेशी समुदायों के लिए 3 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया है।
उन्होंने घोषणा की कि चाय बागान श्रमिक क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को जल्द ही भूमि अधिकार प्रदान किए जाएंगे, जिसके लिए आवेदन पत्र फरवरी की शुरुआत से वितरित किए जाएंगे और उसके बाद भूमि पट्टे जारी किए जाएंगे।
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