5 साल से जर्मनी में माता-पिता से दूर है अरिहा शाह, वीडियो में जाने अमित शाह ने भारत लाने का दिया भरोसा; जानिए क्या है पूरा मामला
गुजरात के अहमदाबाद की रहने वाली अरिहा शाह की कहानी एक बार फिर चर्चा में है। महज 7 महीने की उम्र में जर्मनी की चाइल्ड सर्विसेज ने उसे अपने संरक्षण में ले लिया था। अब अरिहा करीब 5 साल की हो चुकी है, लेकिन वह अब भी अपने माता-पिता धारा और भावेश शाह से अलग जर्मनी में फोस्टर केयर में रह रही है। इस मामले को भारत सरकार कई बार जर्मनी के सामने उठा चुकी है। अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से अरिहा को भारत वापस लाने का भरोसा दिए जाने के बाद परिवार और इस अभियान से जुड़े लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं।
अमित शाह से मुलाकात में उठा अरिहा का मुद्दा
जानकारी के मुताबिक, 17 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद के पालडी में जैनाचार्य गच्छाधिपति उदयप्रभ सूरीश्वरजी महाराज साहेब से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान दोनों के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई। बातचीत में जर्मनी में रह रही अरिहा शाह का मामला भी उठाया गया।
अहमदाबाद में अरिहा की वापसी के लिए अभियान चला रहे लोगों के अनुसार, अमित शाह ने बच्ची को भारत वापस लाने के प्रयासों का भरोसा दिया है। इससे पहले भी अरिहा की वापसी का मुद्दा भारतीय अधिकारियों और जैन समुदाय के प्रतिनिधियों की ओर से उठाया जाता रहा है
आखिर जर्मनी की चाइल्ड सर्विसेज अरिहा को अपने साथ क्यों ले गई थी?
अरिहा शाह का जन्म फरवरी 2021 में जर्मनी की राजधानी बर्लिन में हुआ था। उसके माता-पिता धारा और भावेश शाह गुजरात के रहने वाले हैं और उस समय जर्मनी में रह रहे थे। 23 सितंबर 2021 को, जब अरिहा महज 7 महीने की थी, जर्मनी की बाल कल्याण एजेंसी जुगेन्डआम्ट (Jugendamt) ने उसे अपने संरक्षण में ले लिया।
रिपोर्टों के मुताबिक, अरिहा को चोट लगने के बाद अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद जर्मन अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू की और बच्ची की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। शुरुआती दौर में उसके माता-पिता के खिलाफ दुर्व्यवहार से जुड़े आरोप भी सामने आए थे।हालांकि, दिसंबर 2021 में मेडिकल विशेषज्ञों ने यौन उत्पीड़न की आशंका को खारिज किया और फरवरी 2022 में अभियोजन पक्ष ने इससे संबंधित आपराधिक आरोपों को आगे नहीं बढ़ाया। इसके बावजूद बच्ची की कस्टडी माता-पिता को वापस नहीं मिली। जर्मनी की पारिवारिक अदालत में उसकी देखभाल और अभिभावकत्व को लेकर अलग कानूनी कार्यवाही जारी रही।
भारत सरकार लगातार उठा रही है मामला
अरिहा की वापसी के लिए उसके माता-पिता लंबे समय से कानूनी और राजनयिक स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। भारत सरकार भी जर्मनी के अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठा चुकी है। भारत की ओर से बच्ची के भारतीय नागरिक होने के साथ-साथ उसकी भाषा, धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक परिवेश से जुड़े अधिकारों पर जोर दिया गया है।जनवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ बातचीत के दौरान अरिहा का मामला उठाया था। इससे पहले भी भारतीय विदेश मंत्रालय और बर्लिन स्थित भारतीय दूतावास इस विषय पर जर्मन अधिकारियों के संपर्क में रहे हैं
अब तक भारत क्यों नहीं लौट पाई अरिहा?
इस मामले की सबसे बड़ी जटिलता जर्मनी की बाल कल्याण व्यवस्था और वहां की अदालतों से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया है। बच्ची की कस्टडी को लेकर जर्मन अदालतों में हुए फैसलों के कारण उसकी वापसी का रास्ता आसान नहीं रहा है। भारत सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जाने के बावजूद अरिहा अभी तक भारत नहीं लौट पाई है।अक्टूबर 2026 में आई रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी 22 और 23 अक्टूबर को जर्मनी की यात्रा के दौरान इस मुद्दे को उठाने वाले हैं। इस घटनाक्रम से अरिहा की वापसी के लिए जारी राजनयिक प्रयासों को लेकर एक बार फिर उम्मीद जगी है। हालांकि, उसकी भारत वापसी की कोई निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है।
परिवार को बेटी की वापसी का इंतजार
अरिहा शाह का मामला अब केवल एक परिवार की कस्टडी की लड़ाई नहीं, बल्कि भारत और जर्मनी के बीच एक संवेदनशील मानवीय मुद्दा बन चुका है। उसके माता-पिता लगातार अपनी बेटी से दोबारा साथ रहने की उम्मीद लगाए हुए हैं। वहीं, भारत सरकार भी उसके मामले को जर्मन अधिकारियों के सामने उठाती रही है।अब देखना होगा कि अमित शाह के आश्वासन और आगे होने वाली राजनयिक बातचीत के बाद इस मामले में क्या प्रगति होती है। फिलहाल, अरिहा की भारत वापसी को लेकर अंतिम फैसला और उसकी समय-सीमा स्पष्ट नहीं है।