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संगीतकार एआर रहमान ने हिंदी सिनेमा को बताया 'कम्युनल', भड़के संत समाज ने कहा 'जिहादी'

 

अयोध्या, 16 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय सिनेमा के ऑस्कर विनर संगीतकार ए आर रहमान अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। सिंगर ने बीबीसी एशियन के यूट्यूब चैनल पर दिए एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हे काम मिलने में परेशानी हो रही हैं और हिंदी सिनेमा में अब कम्युनलिज्म देखने को मिलता है।

संगीतकार के इस बयान का अयोध्या के साधु-संतों ने विरोध किया है और ए आर रहमान को जिहादी तक कह दिया है।

संगीतकार के धर्म- परिवर्तन पर निशाना साधते हुए जगत गुरु परमहंसाचार्य महाराज ने कहा, "फिल्म इंडस्ट्री में उन्हीं को काम मिलना चाहिए, जो अच्छे इंसान हैं। रहमान की सोच बहुत खराब है। वे पहले हिंदू थे और उस वक्त वहां मुसलमानों का वर्चस्व था, तो धर्म बदलकर इस्लाम अपना लिया। वे काफी समय से सनातन धर्म को टारगेट कर रहे हैं, जो बिल्कुल भी सही नहीं है। ऐसे लोगों को बिल्कुल भी काम नहीं मिलना चाहिए, क्योंकि न तो ये राम के हैं और न ही रहीम के। ये देश के लिए बड़ा खतरा हैं।"

वहीं सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के देवेशाचार्य जी महाराज ने कहा, "फिल्म उद्योग के लिए 'कम्युनल' शब्द का इस्तेमाल करना ही गलत है। पहले ए आर रहमान के अंदर योग्यता थी और लोगों ने बहुत पसंद भी किया, ऑस्कर भी मिला, लेकिन अब उनकी योग्यता में कमी आई है। आज संगीत के क्षेत्र में इंडस्ट्री में बहुत सारी प्रतिभाएं हैं, जिन्हें मौका मिल रहा है, लेकिन ए आर रहमान हमेशा इंडस्ट्री पर कब्जा करके नहीं रह सकते। बाकी लोगों को भी बराबर का अवसर मिलना चाहिए। कम्युनल कहने से ये दया के पात्र नहीं बनेंगे और न ही उन्हें काम मिलेगा।"

दिवाकराचार्य महाराज ने कहा कि संगीतकार ए आर रहमान जेहादी है और अपनी सहूलियत के हिसाब से धर्म बदलने से काम नहीं मिलता है। उन्होंने कहा, "ऑस्कर अवॉर्ड जीतने के बाद निरंतरता बनाए रखना भी जरूरी है। भले ही कोई किसी भी क्षेत्र में क्यों न हो, निरंतरता होना जरूरी है और दूसरा, अब संगीत के क्षेत्र में कई युवा संगीतकार आए हैं, जो अपने काम में बहुत अच्छे हैं और ए आर रहमान को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने अपने काम के साथ निरंतरता नहीं बनाए रखी और यही वजह है कि अब उन्हें काम नहीं मिल रहा है।"

बता दें कि बीबीसी एशियन के यूट्यूब पर दिए इंटरव्यू में संगीतकार ने रामायण और महाभारत से लेकर इंडस्ट्री में काम न मिलने का जिक्र किया। संगीतकार ने पिछले आठ सालों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के भीतर सत्ता परिवर्तन और सांप्रदायिक भावना महसूस की, लेकिन उनके साथ कभी भी ये सामने से नहीं हुआ, बल्कि उनके कानों में ये बातें आती रहीं।

--आईएएनएस

पीएस/एएस