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अपराधियों को चुनाव लड़ने की राहत और लोकतंत्र बचाने निकले लोगों को जेल, कोर्ट के फैसलों पर भड़की सीपीआई

 

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। सीपीआई की वरिष्ठ नेता एनी राजा ने हाईकोर्ट द्वारा हत्या के मामले में सजायाफ्ता अपराधी को चुनाव लड़ने की अनुमति देने और सीएए विरोधी आंदोलन में शामिल लोगों को रिहाई न मिलने को लेकर केंद्र सरकार और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि देश में जो आंदोलन चल रहा है, वह देश को तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए है और नरेंद्र मोदी सरकार सीएए जैसे कानूनों के जरिए संविधान को नष्ट कर रही है।

सीपीआई नेता एनी राजा ने कहा, "देश में आज अखबारों में ये खबर आ रही है कि एक हाईकोर्ट ने एक मर्डर केस के अपराधी को आने वाले चुनाव में चुनाव लड़ने की अनुमति देते हुए उसकी सजा पर राहत दी है। सीजेपी जनवाद और धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए आंदोलन में निकली, लेकिन उन्हें रिहाई नहीं मिली।"

उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि चुनाव और वोट बहुत महत्वपूर्ण हैं, तो उनको बचाने के लिए जो आंदोलन में निकला था, उसे रिहाई नहीं मिल रही। हमें फिर देखना है कि हम कौन से देश में रह रहे हैं। अपराधियों को सारी राहत मिल रही है, मगर जो लोकतंत्र में असहमति व्यक्त कर रहे हैं, क्योंकि लोकतंत्र का मूल ही असहमति है, ऐसे लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है और उन्हें कोई राहत नहीं मिल रही है। सोचने की बात है। उन लोगों को तुरंत रिहा करना चाहिए।

आरएसएस प्रमुख के बयान को लेकर एनी राजा ने कहा कि देश के अंदर जो चल रहा है, वह संविधान को बचाने की बात है। हमारे देश का संविधान एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष संविधान है। यह जनवाद और धर्मनिरपेक्षता का संविधान है। इसे खत्म करने और नष्ट करने के लिए देश की फासीवादी नरेंद्र मोदी सरकार ने सीएए के माध्यम से एक बड़े हथियार के रूप में इसका इस्तेमाल किया है।

उन्होंने कहा कि इसलिए इसके खिलाफ जनता खड़ी है। देश को तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि देश को बचाने के लिए, देशवासियों को बचाने के लिए जो आंदोलन अभी भारत में चल रहा है, उसे इधर-उधर की बातें कहकर उसकी वास्तविक मांगों पर कुछ न बोलना उचित नहीं है। मोहन भागवत को हमारे देश के संविधान में विश्वास होना चाहिए। उन्हें इस देश के संविधान और देशवासियों पर विश्वास होना चाहिए। उन्हें लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता पर विश्वास होना चाहिए।

एनी राजा ने कहा कि तभी उन्हें पता चलेगा कि जो व्यवस्था परिवर्तन की बात हो रही है, हमारे देश में एक बहुत मजबूत व्यवस्था है, चुनाव है और चुनाव के माध्यम से बहुत कुछ हो रहा है। हम देख रहे हैं कि आवश्यक बदलाव उसी प्रक्रिया से आ रहे हैं। देश को बचाने के लिए और देश के संविधान को बचाने के लिए आंदोलन भी हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे देश में लोकतांत्रिक तरीके से संसद को भी हम देख रहे हैं कि उसका किस प्रकार दुरुपयोग हो रहा है। संसद के अंदर कैसे-कैसे नीतियां बनाई जा रही हैं, कैसे-कैसे कानून बनाए जा रहे हैं। जिन कानूनों को वर्षों की मेहनत और आंदोलनों के संघर्ष से हासिल किया गया था, चाहे वह लेबर कोड हों या अन्य तमाम कानून, उन्हें दरकिनार करके पूरी तरह मजदूर-विरोधी और जन-विरोधी कानून लाए जा रहे हैं। संसद और संविधान का दुरुपयोग करते हुए यह फासीवादी सरकार लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता का अनादर कर रही है। देश में यही हो रहा है। इसलिए संविधान को बचाना और संसदीय लोकतंत्र को बचाना बहुत जरूरी है।

--आईएएनएस

केके/वीसी