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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का शुभारंभ, भगवान रघुनाथ के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

 

कुल्लू, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का शुभारंभ हो गया है। इस अवसर पर भगवान रघुनाथ के सुल्तानपुर स्थित मंदिर में शीश नवाने के लिए सुबह से ही देवी-देवताओं की झांकी के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी मंदिर पहुंचते हैं और भगवान रघुनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेन्द्र सिंह ने बताया कि इस वर्ष कुल 347 देवी-देवताओं की झांकियों को दशहरा उत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। सुबह से ही विभिन्न क्षेत्रों से देवी-देवताओं की पालकियां भगवान रघुनाथ के मंदिर पहुंच रही हैं। वहीं, माता हिडिंबा के कुल्लू पहुंचने के बाद पारंपरिक रथ यात्रा का शुभारंभ हो गया।

दानवेंद्र सिंह ने सभी लोगों को अंतरराष्ट्रीय कुल्लू विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान रघुनाथ कुल्लू घाटी के आराध्य देव हैं और उनके दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि कई श्रद्धालु 100 से 200 किलोमीटर तक की पैदल यात्रा कर भगवान रघुनाथ के समक्ष अपनी श्रद्धा अर्पित करने आते हैं। स्थानीय भाषा में इस परंपरा को 'अठ चाकरी' (या आठ चाकरी) कहा जाता है, जो कुल्लू घाटी और विशेष रूप से कुल्लू दशहरा की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सदियों पुरानी देव परंपरा है।

उन्होंने कहा कि विजयादशमी के अवसर पर मुख्य मंदिर से भगवान रघुनाथ की भव्य शोभायात्रा ढालपुर मैदान के लिए प्रस्थान करेगी। यह यात्रा कुल्लू की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और देव संस्कृति का अद्भुत प्रदर्शन होगी। रघुनाथ जी पूरे लाव-लश्कर के साथ ढालपुर मैदान पहुंचेंगे, जहां सात दिनों तक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

उत्सव के दौरान ढालपुर मैदान में प्रतिदिन भगवान रघुनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। यहां भगवान रघुनाथ खुले दरबार में श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। नाग देवता, नारायण और अन्य देवी-देवताओं की उपस्थिति से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब जाएगा।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में शामिल होने के लिए कुल्लू राज परिवार की कुलदेवी एवं दादी माता हिडिंबा भी कुल्लू पहुंच चुकी हैं। कुल्लू पहुंचने पर विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने माता का भव्य स्वागत किया। सुल्तानपुर पहुंचने के बाद माता हिडिंबा राज परिवार के साथ भेंट करेंगी। इसके बाद शस्त्र पूजन संपन्न होगा और माता हिडिंबा ढालपुर मैदान के लिए रवाना होंगी, जहां से दोपहर बाद ऐतिहासिक रथ यात्रा का शुभारंभ होगा।

27 अक्टूबर तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय उत्सव के दौरान पूरी कुल्लू घाटी में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उल्लास का माहौल रहेगा। शंखध्वनि, खड़ताल, नरसिंगों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से घाटी का वातावरण भक्तिमय बना रहेगा। हजारों श्रद्धालु और पर्यटक देव संस्कृति के इस अद्भुत संगम के साक्षी बनेंगे।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी