बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की जिंदा जलाकर हत्या, फुटेज में जानें नरसिंदी में मिला जला हुआ शव, 40 दिन में हुई 10 हत्याएं
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। नरसिंदी जिले में 23 वर्षीय हिंदू युवक चंचल चंद्र भौमिक की जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई। शुक्रवार रात उसका जला हुआ शव एक गैराज के अंदर मिला। परिवार और स्थानीय लोगों ने इस घटना को सुनियोजित हत्या बताया है, जबकि पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
यह घटना नरसिंदी शहर के पुलिस लाइंस से सटे मस्जिद मार्केट इलाके की है। चंचल चंद्र भौमिक जिस गैराज में काम करता था, उसी गैराज के अंदर उसका शव बरामद हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। परिजनों का कहना है कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि पूरी तरह से सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना के समय चंचल गैराज के अंदर सो रहा था। देर रात किसी अज्ञात व्यक्ति या लोगों ने बाहर से गैराज के शटर पर पेट्रोल डाला और आग लगा दी। आग लगते ही वह तेजी से पूरे गैराज में फैल गई। शटर बाहर से बंद होने के कारण चंचल बाहर निकल नहीं पाया और उसकी मौके पर ही जलकर मौत हो गई। जब तक आसपास के लोग कुछ समझ पाते, तब तक आग काफी फैल चुकी थी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। हालांकि, अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
चंचल के परिवार का आरोप है कि उसकी हत्या धार्मिक नफरत के चलते की गई है। परिजनों ने प्रशासन से दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और सख्त सजा की मांग की है। इस घटना के बाद इलाके में हिंदू समुदाय के लोगों में भय और आक्रोश का माहौल है।
गौरतलब है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इतना ही नहीं, हत्या के बाद उसके शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई थी। उस घटना ने भी देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 40 दिनों में बांग्लादेश में अब तक 10 हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश सरकार से इन घटनाओं पर सख्त कदम उठाने और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
फिलहाल नरसिंदी की घटना ने एक बार फिर बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की चिंता को गहरा कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है।