अन्नामलाई ने टीवीके सरकार के 'श्वेत पत्र' को बताया कुप्रबंधन का 'पोस्टमॉर्टम'
चेन्नई, 19 जून (आईएएनएस)। 'वी द लीडर्स मूवमेंट' के संस्थापक और पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) सरकार द्वारा जारी तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति संबंधी श्वेत पत्र को राज्य के वित्तीय कुप्रबंधन का 'पोस्ट-मॉर्टम' करार दिया है।
'वी द लीडर्स मूवमेंट' के संस्थापक अन्नामलाई ने एक्स पर जारी बयान में कहा, "मैंने तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति पर तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) सरकार द्वारा जारी 'व्हाइट पेपर' (श्वेत पत्र) को देखने के लिए कुछ समय निकाला। इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है, क्योंकि ज्यादातर बातें पहले से ही पता थीं। कई मायनों में, यह पिछले पांच सालों में राज्य के वित्तीय कुप्रबंधन का 'पोस्ट-मॉर्टम' है। यह गिरावट के स्तर को उजागर करता है और तमिलनाडु के मुख्य वित्तीय संकेतकों की तुलना इसी तरह के अन्य औद्योगिक राज्यों से करता है।"
अन्नामलाई ने कहा, "10 लाख करोड़ रुपये का बकाया कर्ज और प्रति व्यक्ति बकाया कर्ज 1,28,934 रुपये है। कुल राजस्व प्राप्ति का 22.8 फीसदी हिस्सा ब्याज भुगतान में जा रहा है। सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के मुकाबले राज्य के अपने कर राजस्व का अनुपात 2021-22 में 5.93 फीसदी से घटकर 2025-26 में 5.45 फीसदी हो गया है। बिजली, परिवहन और नागरिक आपूर्ति क्षेत्रों में राज्य के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर कुल 3.18 लाख करोड़ का कर्ज है। सिस्टम में भ्रष्टाचार, रियल एस्टेट की कीमतों को कम दिखाकर रजिस्ट्रेशन से होने वाले राजस्व को कम करना, और ऐसी ही कई वजहों से राजस्व का नुकसान।"
पूर्व भाजपा नेता अन्नामलाई ने आगे कहा, "2031 तक तमिलनाडु में काम करने वाली उम्र की आबादी (वर्किंग-एज पॉपुलेशन) कम हो रही है, जिससे राज्य के पास अपने राजस्व आधार को सुधारने और मजबूत करने के लिए बहुत कम समय बचा है। यह एक गंभीर मुद्दा है! इसलिए, टीवीके सरकार के पास बहुत कम समय है। उसे इस व्हाइट पेपर को काम न कर पाने के बहाने के तौर पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए; बल्कि, हुए नुकसान को ठीक करने के तरीके खोजने चाहिए।"
अन्नामलाई ने मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार को सुझाव भी दिया है। उन्होंने कहा, "मेरा सुझाव है कि सरकार एक "कामकाजी" परामर्श समूह बनाए। इसमें न केवल शिक्षाविद और अर्थशास्त्री शामिल हों, बल्कि सभी क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी हों, ताकि मौजूदा संकट को कम करने के लिए रचनात्मक तरीके खोजे जा सकें।"
--आईएएनएस
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