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अंकिता भंडारी केस: राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी, वीडियो में जाने दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति रोकने की मांग

 

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। राहुल गांधी ने भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के मामले में राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मांग की है कि अंकिता भंडारी केस की जांच पूरी होने तक उन्हें राज्यपाल का पदभार ग्रहण करने से रोका जाए।

इसी बीच अंकिता के माता-पिता ने भी गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने सरकार को अपनी मांग पर कार्रवाई के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। मामले में दलित बुद्धिजीवियों की ओर से कांग्रेस के नाम एक खुला पत्र भी सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि नैतिकता केवल बयानबाजी में नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के आचरण में भी दिखाई देनी चाहिए।

अंकिता के माता-पिता ने उठाए कई सवाल

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अंकिता भंडारी के माता-पिता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मामले की जांच और उससे जुड़े कई पहलुओं पर सवाल उठाए। उन्होंने 18 और 19 सितंबर 2022 के दौरान अजय कुमार और दुष्यंत कुमार की लोकेशन तथा कॉल रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना है कि इन जानकारियों से मामले से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि हत्याकांड के मुख्य आरोपी पुलकित आर्य का पुराना मोबाइल फोन विशेष जांच दल (SIT) ने बरामद क्यों नहीं किया। इसके अलावा उन्होंने आरोपियों के रिजॉर्ट को ध्वस्त किए जाने की परिस्थितियों पर भी जवाब मांगा।ये मांगें और सवाल अंकिता के माता-पिता की ओर से उठाए गए हैं। संबंधित व्यक्तियों की भूमिका या किसी आरोप की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है।

2022 में हुई थी अंकिता भंडारी की हत्या

अंकिता भंडारी उत्तराखंड के एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया था और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, अंकिता के परिवार की ओर से कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं।परिवार का आरोप है कि मामले के कुछ पहलुओं पर अब भी स्पष्टता की जरूरत है। कथित वीआईपी की पहचान और उससे जुड़े सवालों को लेकर परिजन लगातार जांच की मांग कर रहे हैं। दुष्यंत कुमार गौतम का नाम भी इसी विवाद के संदर्भ में उठाया जा रहा है, लेकिन उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

दलित बुद्धिजीवियों ने कांग्रेस को लिखा खुला पत्र

इस विवाद के बीच दलित बुद्धिजीवियों ने कांग्रेस के नाम खुला पत्र लिखकर कहा कि नैतिकता की बात करने वाले राजनीतिक दलों को अपने आचरण में भी इसका पालन करना चाहिए। पत्र का संदेश राजनीतिक दलों की जवाबदेही और उनके व्यवहार में नैतिक मानकों को लेकर था।अंकिता भंडारी मामले में अब राजनीतिक मांगों के साथ-साथ जांच से जुड़े सवाल भी चर्चा में हैं। राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से नियुक्ति पर रोक लगाने का आग्रह किया है, जबकि अंकिता के माता-पिता ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और जांच से जुड़े तथ्यों पर सबकी नजर है।