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'अनाथ से स्वनाथ' आफ्टर-केयर सम्मेलन: कपिल मिश्रा बोले-विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब हर बच्चा आगे बढ़े

 

नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। नई उड़ान ट्रस्ट एवं विश्व मांगलय स्वनाथ परिषद के संयुक्त तत्वावधान में और गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय एवं महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली सरकार के सहयोग से ‘स्वनाथ सम्मेलन-2026: अनाथ से स्वनाथ की ओर’ का भव्य आयोजन गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के ईस्ट दिल्ली कैंपस, सूरजमल विहार स्थित कन्वेंशन हॉल में किया गया।

सम्मेलन के तीसरे एवं अंतिम सत्र की अध्यक्षता दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने की। इस सत्र में आफ्टर-केयर युवाओं के भविष्य, रोजगार, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक पुनर्स्थापन पर विशेष चर्चा हुई। कपिल मिश्रा ने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा, जब समाज का प्रत्येक बच्चा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सके और उसकी प्रतिभा का सही उपयोग हो।

उन्होंने सक्षम परिवारों से अपील की कि वे जरूरतमंद बच्चों को परिवार, शिक्षा और संस्कार देने में आगे आएं। उन्होंने कहा कि "एक बच्चे को सही दिशा देना किसी पूजा से कम नहीं है।"

मिश्रा ने कहा कि समाज के विकास का सही पैमाना केवल भौतिक संसाधनों का निर्माण नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि समाज का हर बेटा और बेटी मुख्यधारा से जुड़े तथा अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सके।

स्वनाथ सम्मेलन-2026 की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक स्वनाथ सहायता केंद्र, स्वनाथ रोजगार केंद्र और स्वनाथ स्वास्थ्य केंद्र का विधिवत विमोचन एवं उद्घाटन रहा। इन तीनों केंद्रों का विमोचन एवं उद्घाटन मंत्री कपिल मिश्रा एवं गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय की कुलपति पद्मश्री प्रो. महेश वर्मा द्वारा किया गया।

‘स्वनाथ सहायता केंद्र’ के माध्यम से आफ्टर-केयर युवाओं को सरकारी योजनाओं, शिक्षा, छात्रवृत्ति, दस्तावेजी सहायता, वित्तीय साक्षरता, मार्गदर्शन, आफ्टर-केयर सेवाओं तथा आवश्यक सामाजिक सहायता से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसके अंतर्गत जरूरतमंद युवाओं को निःशुल्क कानूनी सलाह एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की पहल भी शामिल है, ताकि वे अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं को समझ सकें और आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता प्राप्त कर सकें।

'स्वनाथ रोजगार केंद्र' का उद्देश्य आफ्टर-केयर युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, करियर काउंसलिंग, रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता और विभिन्न रोजगार अवसरों से जोड़ना है। केंद्र के माध्यम से युवाओं की रुचि और क्षमता के अनुसार कौशल विकास तथा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न संस्थाओं एवं कॉरपोरेट क्षेत्र के साथ समन्वय विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

‘स्वनाथ स्वास्थ्य केंद्र’ के माध्यम से आफ्टर-केयर युवाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य एवं वेलनेस, स्वास्थ्य जागरूकता तथा आवश्यक चिकित्सा सहायता से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा। सम्मेलन में आयोजित स्वास्थ्य जांच शिविर को इसी सोच की प्रारंभिक कड़ी के रूप में देखा गया, जिसमें डेंटल चेकअप, आई चेकअप तथा प्रशिक्षित फिजिशियन डॉक्टरों की टीम ने प्रतिभागियों को स्वास्थ्य सेवाएं एवं परामर्श प्रदान किया।

सम्मेलन के दौरान दिल्ली महिला एवं बाल विकास विभाग सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए, जहां प्रतिभागियों को विभागीय योजनाओं, बाल संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त अनेक स्कूलों के विद्यार्थियों ने भी अपनी रचनात्मक एवं शैक्षणिक प्रदर्शनियां प्रस्तुत कीं।

कार्यक्रम में हेल्थ चेकअप कैंप का भी आयोजन किया गया, जिसमें डेंटल चेकअप, आई चेकअप तथा प्रशिक्षित फिजिशियन डॉक्टरों की टीम द्वारा स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं एवं परामर्श प्रदान किया गया। बड़ी संख्या में युवाओं और प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य जांच शिविर का लाभ उठाया।

महिला एवं बाल विकास विभाग (डब्लूसीडी) के डिप्टी डायरेक्टर एस. एम. अली ने स्वनाथ सम्मेलन को संबोधित करते हुए अनाथ एवं जरूरतमंद बच्चों के संरक्षण, सम्मान और बेहतर भविष्य के लिए समाज एवं विभाग की सामूहिक जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला। उन्होंने बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने तथा उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने ‘अनाथ से स्वनाथ’ जैसी पहल को सामाजिक संवेदनशीलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कार्यक्रम के आयोजकों, सहयोगी संस्थाओं एवं सभी प्रतिभागियों की सराहना की तथा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हरसंभव सहयोग का संदेश दिया।

संपूर्ण 'स्वनाथ सम्मेलन-2026' की अध्यक्षता एवं संयोजन नई उड़ान ट्रस्ट के संस्थापक एवं विश्व मंगल्य स्वनाथ परिषद के संयोजक महेंद्र रावत ने किया। सम्मेलन के सफल आयोजन में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, सरकारी विभागों, विश्वविद्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों, बाल देखभाल संस्थानों, स्वयंसेवकों, चिकित्सकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और प्रतिभागियों के प्रति उन्होंने आभार व्यक्त किया।

महेंद्र रावत ने कहा कि ‘स्वनाथ सम्मेलन-2026’ किसी अभियान का अंत नहीं, बल्कि एक नई सामाजिक यात्रा की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि अनाथ एवं देखभाल की आवश्यकता वाले बच्चों को केवल संरक्षण देने के बजाय उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, रोजगार, परिवार जैसा सहयोग, मार्गदर्शन और सम्मानजनक आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने कहा, "यह तो एक शुरुआत मात्र है। बहुत जल्द हम इससे भी बड़े और व्यापक स्तर के कार्यक्रम की योजना बना रहे हैं, जिसमें देशभर से बाल अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कॉरपोरेट, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर आफ्टर-केयर युवाओं के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।"

उन्होंने कहा कि 'स्वनाथ' की सोच को दिल्ली तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे देश के अन्य हिस्सों तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा 18 वर्ष की आयु के बाद स्वयं को अकेला और असहाय महसूस न करे।

प्रशांत हरतालकर ने कहा कि इस अभियान का लक्ष्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि ‘स्वनाथ सहायता केंद्र’, 'स्वनाथ रोजगार केंद्र' और ‘स्वनाथ स्वास्थ्य केंद्र’ जैसी स्थायी सहयोग व्यवस्थाओं को विकसित करना है, ताकि बच्चों और आफ्टर-केयर युवाओं को आवश्यकता के समय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कानूनी सहायता, मार्गदर्शन और अन्य आवश्यक सहयोग मिल सके।

उन्होंने सभी सहयोगियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “जब समाज एक बच्चे का हाथ थामता है, तो वह केवल एक जीवन नहीं बदलता, बल्कि आने वाली पूरी पीढ़ी का भविष्य बदल देता है।”

सम्मेलन में आयोजकों ने कहा कि ‘स्वनाथ’ केवल एक नाम नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में परिवर्तन का प्रयास है। किसी बच्चे को उसकी पारिवारिक परिस्थिति से पहचानने के बजाय उसकी प्रतिभा, क्षमता, अधिकार और सपनों से पहचानने की जरूरत है।

स्वनाथ वह है जो शिक्षा प्राप्त करता है। स्वनाथ वह है जिसे अपने अधिकारों की जानकारी है। स्वनाथ वह है जो कौशल और अवसर के साथ आगे बढ़ता है। स्वनाथ वह है जो अपने पैरों पर खड़ा होकर सम्मान के साथ जीवन जीता है। सम्मेलन में यह संकल्प दोहराया गया कि 18 वर्ष की आयु के बाद भी युवाओं का साथ नहीं छूटना चाहिए। उन्हें शिक्षा से रोजगार, स्वास्थ्य से सुरक्षा, कानूनी सहायता से अधिकार और संरक्षण से आत्मनिर्भरता तक एक निरंतर सहयोग प्रणाली उपलब्ध कराना आवश्यक है।

स्वनाथ सम्मेलन-2026 ने यह संदेश दिया कि किसी बच्चे का अतीत उसके भविष्य का निर्धारण नहीं करता। यदि सरकार, विश्वविद्यालय, सामाजिक संगठन, कॉरपोरेट क्षेत्र और संवेदनशील नागरिक मिलकर काम करें तो प्रत्येक बच्चा आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन की नई शुरुआत कर सकता है। 'अनाथ' से 'स्वनाथ' तक की यात्रा केवल शब्दों का परिवर्तन नहीं, बल्कि सोच, व्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारी में बदलाव की यात्रा है।

--आईएएनएस

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