एएमयू विवाद पर शिया नेताओं ने दी प्रतिक्रिया, धार्मिक नारेबाजी को लेकर उठाए सवाल
लखनऊ, 13 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में हाल के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास और शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास ने प्रतिक्रिया दी। दोनों नेताओं ने अलग-अलग मुद्दों पर अपनी राय रखते हुए शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
सहारनपुर में आतंकी संबंधों के आरोप में एक व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने के मामले पर मौलाना यासूब अब्बास ने आईएएनएस से कहा कि यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल है तो उसके खिलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। देश और समाज के खिलाफ काम करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों का आतंकवाद या पड़ोसी देशों से किसी तरह का कोई संबंध नहीं है, उन्हें बेवजह निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा रावण का उदाहरण दिए जाने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और वह राज्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही बयान देते हैं। मुख्यमंत्री जो भी कह रहे हैं, वह सोच-समझकर कह रहे हैं। ऐसे में लोगों को कम से कम उनकी बात को समझने और उस पर विचार करने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि प्रदेश में शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में एक उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री द्वारा 'जय श्री राम' के नारे लगाए जाने के मुद्दे पर भी मौलाना यासूब अब्बास ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें 'जय श्री राम' के नारों से कोई आपत्ति नहीं है लेकिन हर चीज की एक उचित जगह होती है। उनके अनुसार, 'जय श्री राम' का उद्घोष मंदिरों में और 'अल्लाहु अकबर' का नारा मस्जिदों में होना चाहिए।
इसी मुद्दे पर शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चाहे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय हो या बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, किसी भी शैक्षणिक संस्थान में धार्मिक नारेबाजी शिक्षा के माहौल को कमजोर करती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसे नारों को बढ़ावा देता है या उनका समर्थन करता है, तो यह उचित नहीं है और ऐसा नहीं होना चाहिए।
--आईएएनएस
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