अमरेली में एशियाई शेरों की सुरक्षा के लिए देश का पहला लॉयन अंडरपास तैयार, रेल हादसों में आएगी कमी
अमरेली, 22 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात के अमरेली जिले में एशियाई शेरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए देश का पहला लॉयन अंडरपास बनकर तैयार हो गया है। यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण और रेल सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पश्चिम रेलवे और गुजरात वन विभाग की संयुक्त पहल से तैयार इस अंडरपास का उद्देश्य शेरों और अन्य वन्यजीवों को रेलवे ट्रैक पार करते समय होने वाली दुर्घटनाओं से बचाना है।
गुजरात का गीर वन्यजीव अभयारण्य एशियाई शेरों का दुनिया में एकमात्र प्राकृतिक आवास है। इसका बड़ा हिस्सा अमरेली जिले में फैला हुआ है। इसी क्षेत्र से पश्चिम रेलवे की व्यस्त रेल लाइन गुजरती है, जहां अक्सर शेर और अन्य जंगली जानवर ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं। इन घटनाओं को रोकने के लिए ढसा, राजुला और राजुला, पीपावाव रेलखंड पर विशेष वाइल्डलाइफ अंडरपास बनाए जा रहे हैं।
करीब 9.42 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना के तहत कुल पांच लॉयन अंडरपास बनाए जाने हैं। इनमें से पहला अंडरपास पूरी तरह तैयार हो चुका है, जबकि शेष चार पर काम जारी है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना से वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ रेल परिचालन भी अधिक सुरक्षित और सुचारु होगा।
भावनगर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) दिनेश वर्मा ने बताया, "यदि अमरेली में यह मॉडल सफल रहता है और वन्यजीव दुर्घटनाओं में कमी आती है तो भविष्य में इसे देश के अन्य वन्यजीव बहुल क्षेत्रों से गुजरने वाले रेलवे मार्गों पर भी लागू किया जाएगा। यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक रेल अवसंरचना के बीच बेहतर संतुलन का उदाहरण है।"
स्थानीय लोगों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। अमरेली के किसान महेंद्र खुमान ने कहा, "जिले में एशियाई शेरों की संख्या काफी अधिक है और रेलवे ट्रैक उनके लिए बड़ा खतरा बन जाता है। भेराई क्षेत्र में बनाया गया यह अंडरपास शेरों की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। इस रेल कॉरिडोर पर बनने वाले सभी पांच अंडरपास वन्यजीवों के लिए सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएंगे और दुर्घटनाओं में कमी लाएंगे।"
रेलवे का कहना है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य शेरों और अन्य वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना, रेल परिचालन को सुरक्षित बनाना और 'जीरो एक्सीडेंट' के लक्ष्य की ओर बढ़ना है। रेलवे, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के समन्वित प्रयास से शुरू हुई यह पहल न केवल एशियाई शेरों के संरक्षण को मजबूती देगी, बल्कि देश में वन्यजीव सुरक्षा के लिए एक नए मॉडल के रूप में भी स्थापित हो सकती है।
--आईएएनएस
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