बिहार में एलपीजी संकट की आशंका के बीच सरकार का बड़ा कदम, PDS दुकानों से मिलेगा कोकिंग कोयला
राज्य में रसोई गैस (एलपीजी) की संभावित कमी को देखते हुए बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण और वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि अब जन वितरण प्रणाली (PDS) की दुकानों के माध्यम से आम लोगों को खाना पकाने के लिए कोकिंग कोयला उपलब्ध कराया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य उन परिवारों को राहत देना है, जिन्हें गैस आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में दैनिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में एलपीजी की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था को लेकर कुछ अनिश्चितताओं की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों की रसोई प्रभावित न हो। इसी को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक ईंधन के रूप में कोकिंग कोयला उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
राज्य सरकार का मानना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली, जो पहले से ही अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराती है, उसे अब ईंधन आपूर्ति के लिए भी उपयोग किया जा सकता है। इस योजना के तहत चयनित PDS दुकानों पर कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, जिससे जरूरतमंद परिवार आसानी से इसे प्राप्त कर सकेंगे।
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में उन जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां एलपीजी आपूर्ति में अधिक बाधा की आशंका है या जहां गरीब परिवारों की संख्या अधिक है। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे राज्य में इसे लागू किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि कोकिंग कोयला एक पारंपरिक ईंधन है, जिसका उपयोग ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लंबे समय से खाना पकाने के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, इसके उपयोग को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं भी सामने आती रही हैं, लेकिन फिलहाल आपात स्थिति में इसे एक व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है।
इस निर्णय के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का कहना है कि यह कदम गैस संकट के समय राहत देने वाला साबित होगा, जबकि कुछ पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसके उपयोग से बढ़ने वाले प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है।
वहीं, विपक्षी दलों ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आधुनिक समय में सरकार को एलपीजी आपूर्ति को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि लोगों को फिर से पारंपरिक और प्रदूषणकारी ईंधन की ओर ले जाना चाहिए।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भविष्य में इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निगरानी व्यवस्था भी तैयार की जाएगी, ताकि कोयले का वितरण पारदर्शी और सुचारू रूप से हो सके।
फिलहाल, सरकार का जोर इस बात पर है कि किसी भी स्थिति में आम जनता की रसोई प्रभावित न हो और हर घर तक खाना पकाने के लिए कोई न कोई वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराया जा सके।