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अमेरिका से भारत तक गूंजेगी गाय‍िका मिलबेन की 'ओम जय जगदीश हरे' प्रस्‍तुत‍ि, सभी को दी दीपावली की शुभकामनाएं

 

वॉश‍िंगटन, 7 नवंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने सभी भारतवास‍ियों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं। इस खास मौके पर उनकी ओर से गाई गई यादगार आरती 'ओम जय जगदीश हरे' एक बार फिर लोगों के घरों और दिलों में गूंजेगी।

अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने सभी को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए अपने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर पोस्ट किया, ''कल, रविवार को दुनियाभर में दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। इस खास मौके पर प्रस्तुत किया गया यादगार भजन 'ओम जय जगदीश हरे' एक बार फिर लोगों के घरों और दिलों में गूंजेगा।'' मैरी ने प्रस्तुति देखने के लिए लोगों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से जुड़ने की अपील की।

अमेरिका की मशहूर सिंगर मैरी मिलबेन पहले भी 'ओम जय जगदीश हरे' आरती गा चुकी हैं। उन्‍होंने भारत के लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली है।

मैरी मिलबेन ने संगीत के क्षेत्र में अपने करियर को लेकर कहती हैं कि‍ संगीत के लिए मेरी रुचि मेरे जीवन के काफी शुरुआत में ही हुई। एक क्रिश्चियन महिला होने के नाते मैं धार्मिक माहौल में बड़ी हुई। मेरी मां ने सिंगल मदर की तरह चार बच्चों को पाला। उन्होंने 20-30 साल तक मंत्रालय में काम किया। हम चर्च में गाना गाते हुए बड़े हुए। म्यूजिक की शुरुआत स्कूल से नहीं, बल्कि चर्च से हुई। संगीत के प्रति प्यार की वजह से मैंने कॉलेज में भी पढ़ाई की और फिर अपने संगीत के क्षेत्र में ही अपना करियर भी बनाया।"

उन्होंने कहा कि यह मेरी पहली पसंद नहीं थी। मैंने व्हाइट हाउस में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के कार्यकाल में वहां पर सबसे छोटे स्टाफ के तौर पर काम किया। वहां पर मुझे गाने का मौका मिला। वहां से संगीत के क्षेत्र में मेरे करियर की शुरुआत हुई।

भारत के साथ अपने लगाव को लेकर मैरी मिलबेन कहती हैं कि आप किस कल्चर, धर्म, भाषा और देश से हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। भारत में लोग एक-दूसरे से मानवता से जुड़े हुए हैं। अपने पड़ोसी को प्यार करना, उनका ख्याल रखना, परिवार के सभी सदस्यों से प्यार करना, दयालु होना, ये सभी वैल्यू आपको जोड़कर रखते हैं। इसकी वजह से एक कनेक्शन महसूस हुआ। मेरी मां काफी व्यस्त रहती थी, इस वजह से हमारे घर पर एक महिला थीं, जो हमारा ध्यान रखती थीं। उनका नाम सुनीता पटेल है और वह भारतीय मूल की हैं। उन्होंने बड़ी बहन की तरह हमारा ध्यान रखा। उन्होंने हमें बड़े होने में काफी मदद की। इस वजह से हम भारतीय संस्कृति से बहुत पहले अवगत हो गए। भारतीय संस्कृति, वहां का खाना और वहां के संगीत के बारे में मुझे जानने को मिला।"

--आईएएनएस

एवाई/वीसी