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अमेरिका के टैरिफ पर केंद्र की विदेश नीति फेल, दोस्ती से रिश्ते मजबूत नहीं होते: सुलता देव

 

नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। बीजू जनता दल (बीजेडी) की सांसद सुलता देव ने अमेरिका की ओर से लगाए जा रहे टैरिफ, ई20 पेट्रोल को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी, महिला आरक्षण, राहुल गांधी 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम और एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर कई सवाल उठाए। उन्होंने अमेरिका टैरिफ के मुद्दे पर भारत की विदेश नीति को लेकर भी गंभीर चिंता जताई और कहा कि केवल नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंध या मुलाकातें किसी देश के साथ मजबूत रिश्ते की गारंटी नहीं होतीं।

अमेरिकी टैरिफ को लेकर सुलता देव ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति भारत के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई मुलाकातों का जिक्र करते हुए कहा कि केवल एक-दूसरे से गर्मजोशी से मिलना या गले लगना पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने कहा कि किसी भी देश के साथ संबंध इस आधार पर तय होने चाहिए कि उससे भारत को कितना लाभ मिल रहा है और मुश्किल समय में वह देश भारत के साथ कितना खड़ा होता है। अमेरिका की ओर से भारत पर बार-बार टैरिफ लगाने की बात कही जा रही है। भारत अमेरिकी निवेश और सामान को अपने बाजार में जगह देता है, लेकिन जब भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में जाता है तो उस पर ज्यादा टैरिफ लगाया जाता है। उन्होंने इसे भारतीय किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों के लिए नुकसानदायक बताया।

उन्होंने कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति के आधार पर यह तय करना चाहिए कि अमेरिका के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाए। यदि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर ऊंचा टैरिफ लगाता है तो भारत को भी अपने हितों की रक्षा के लिए जवाबी कदम उठाने पर विचार करना चाहिए। तेल आयात और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता बनाए रखनी चाहिए और किसी दूसरे देश के दबाव में फैसले नहीं होने चाहिए।

ई 20 पेट्रोल को लेकर सुलता देव ने राहुल गांधी के रुख पर सहमति जताते हुए केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वाहन व्यक्ति का है, पैसा व्यक्ति का है और पेट्रोल भी व्यक्ति अपने पैसे से खरीदता है, ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ईंधन की गुणवत्ता और उसके इस्तेमाल के लिए वाहन की तकनीक उपयुक्त हो। उन्होंने तर्क दिया कि अगर पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग बढ़ाई जा रही है तो उसी के अनुरूप वाहनों के इंजन और तकनीक भी तैयार होनी चाहिए। पुराने वाहनों के लिए ई20 ईंधन के प्रभाव को लेकर लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

सुलता देव ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने की जरूरत बताई। उन्होंने सवाल किया कि ई20 पेट्रोल पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ओर से ज्यादा प्रतिक्रिया क्यों आ रही है, जबकि पेट्रोलियम से जुड़ा विषय सीधे पेट्रोलियम मंत्रालय से संबंधित है। उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग और निम्न-मध्यम वर्ग के लोग बड़ी मुश्किल से वाहन खरीदते हैं। कई लोगों के लिए वाहन की ईएमआई पूरी होने तक उसकी उम्र भी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। ऐसे में ईंधन और वाहन की तकनीक को लेकर किसी भी बदलाव का सीधा असर आम लोगों पर पड़ सकता है। सरकार पर कई क्षेत्रों में मिलावट करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों की सुरक्षा और उनके सामान की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

महिला आरक्षण को लेकर बीजेडी सांसद ने केंद्र सरकार से पूछा कि जब संसद में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पारित किया गया था तो इसे तत्काल लागू क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि नए संसद भवन के पहले सत्र के दौरान महिला आरक्षण विधेयक पर देर रात तक चर्चा हुई थी और राज्यसभा में इसे व्यापक समर्थन मिला था। उन्होंने सवाल किया कि यदि महिला आरक्षण कानून पारित हो चुका था तो 2024 के चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर टिकट क्यों नहीं दिया गया। केंद्र सरकार और भाजपा नेताओं ने उस समय विधेयक पारित होने को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया था। ऐसे में अब महिला आरक्षण से जुड़े नए प्रावधानों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। विशेष रूप से परिसीमन का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि यदि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ा जाता है और इससे क्षेत्रीय दलों या राज्यों की मौजूदा सीटों पर असर पड़ता है तो बीजेडी इसका विरोध करेगी। ओडिशा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक क्षेत्रीय पार्टी के तौर पर उन्होंने देखा है कि परिसीमन की वजह से राज्य के प्रतिनिधित्व और सीटों की संख्या पर प्रभाव पड़ सकता है।

सुलता देव ने कहा कि यदि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना है, तो उसमें किसी तरह की शर्त नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि महिलाओं को नि:स्वार्थ रूप से प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए और महिला आरक्षण को दूसरे राजनीतिक प्रावधानों से जोड़ने से बचना चाहिए।

'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम और छात्रों के आंदोलनों को लेकर सुलता देव ने जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शनों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों के दौरान बड़ी संख्या में आम लोग भी छात्रों के समर्थन में सामने आए थे। ऐसे लोगों में दिव्यांग व्यक्ति भी शामिल थे, जिन्होंने अपनी शिक्षा के संघर्ष और छात्रों की परेशानियों को समझते हुए आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि कई अभिभावक भी छात्रों के समर्थन में पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग छात्रों के लिए पानी उपलब्ध करा रहे थे, कुछ भोजन और दवाइयों की व्यवस्था कर रहे थे, जबकि कई लोग स्वेच्छा से छात्रों का समर्थन कर रहे थे। छात्र आंदोलन का मुद्दा अब व्यापक सामाजिक मुद्दा बन चुका है।

एपसीआरए बिल को लेकर पूछे गए सवाल पर सुलता देव ने कहा कि अभी विधेयक की पूरी जानकारी उनके पास नहीं है, इसलिए उसे देखे बिना कोई अंतिम राय देना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जब तक बिल के प्रावधान और उसमें शामिल क्लॉज सामने नहीं आते, तब तक उस पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि मेरे हिसाब से एफसीआरए के तहत बड़ी संख्या में एनजीओ विदेशी अनुदान प्राप्त करते हैं, और इनमें कई संस्थाएं समाज के लिए अच्छा काम भी करती हैं। यह देखना जरूरी होगा कि नए विधेयक में एनजीओ और विदेशी अनुदान से जुड़े नियमों में क्या बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। बिल के प्रावधानों को देखने के बाद ही इस पर अपना स्पष्ट रुख तय किया जाएगा।

--आईएएनएस

पीएसके/डीकेपी