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अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर विदेश मामलों के विशेषज्ञ बोले- भारत अपनी आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक है

 

नई दिल्ली, 3 फरवरी (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर मुहर लग गई है। यूएस के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के बीच काफी तनाव देखने को मिला, जिसमें अमेरिका ने भारत के ऊपर कई टैरिफ (25 फीसदी और रूस से तेल खरीदने की वजह से अतिरिक्त 25 फीसदी) लगाए।

ऐसे में दोनों देशों के बीच पिछले साल से व्यापार समझौते पर बात नहीं बन पा रही थी। हालांकि, अब जब दोनों देशों के बीच समझौता हो गया है, तो विशेषज्ञ इस पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

विदेश मामलों के विशेषज्ञ केपी फैबियन ने कहा, "मैंने पहले ही कहा था कि हमारे यूएस-भारत ट्रेड डील के लिए पीएम मोदी और ट्रंप को बातचीत करनी पड़ेगी। अभी तो ये बातचीत हुई है। इस पर मेरी मिली-जुली प्रतिक्रिया है क्योंकि ये अच्छा है कि कुछ डील हुए हैं, क्योंकि हमारा रुपया नीचे जा रहा था। जियो पॉलिटिक्स में अगर किसी देश का अमेरिका के साथ अच्छा नहीं है और वह दूसरे देशों से बातचीत करता है तो उसकी पोजीशन थोड़ी कमजोर होती है। इसलिए अमेरिका के साथ संबंध मजबूत करना जरूरी है।"

उन्होंने आगे कहा, "डील में जो प्रावधान हैं, वो उतने अच्छे नहीं हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ 18 फीसदी पर कर दिया है। ट्रंप अमेरिका का एक्सपोर्ट्स भारत के लिए जीरो चाहते हैं। ट्रंप का मानना है कि उनका बाजार बहुत बड़ा है। इसलिए जो उनके बाजार में आना चाहते हैं, उन्हें अमेरिका के नियम को मानना पड़ेगा, जबकि ग्लोबल इंपोर्ट्स में अमेरिका का शेयर केवल 9 फीसदी है।"

पूर्व डिप्लोमैट महेश कुमार सचदेव ने कहा, "यह एक सकारात्मक विकास है। यह दिखाता है कि एक तरफ भारत अपनी आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक है और दूसरी ओर वह स्वावलंबी है और आत्मविश्वास के साथ विदेशों के साथ लंबी अवधि के दूरगामी परिणामों वाले व्यापारिक समझौते करने को तैयार है। यह एक सोची-समझी रणनीति के अंतर्गत किया गया है। जो पहले से व्यापारिक समझौते हैं, उससे राष्ट्रपति ट्रंप के ऊपर ये दबाव बना है कि अगर भारत के साथ 50 फीसदी की डील पर कायम रहते हैं तो इससे अमेरिका को नुकसान होगा और बाकी देशों के साथ जो समझौते हुए हैं, उससे भारत में अमेरिका का बाजार छिन सकता है।"

इसके अलावा दोनों देशों के बीच हुए समझौते को लेकर सीएसआईएस में भारत और इमर्जिंग एशिया इकोनॉमिक्स के चेयर रिक रोसो ने कहा, "आज का दिन काफी ऐतिहासिक है, जब अमेरिका और भारत ने अपने लंबे समय से इंतजार किए जा रहे द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की है। यह लगभग एक साल बाद हुआ है जब नेताओं ने व्हाइट हाउस में एक मीटिंग के बाद पहली बार इसकी घोषणा की थी। 2025 के ज्यादातर समय तक भारतीय इंपोर्ट पर भारी टैरिफ लागू रहने के बावजूद व्यापार काफी मजबूत बना हुआ है।"

इस संबंध में मार्केट एक्सपर्ट सुनील शाह ने कहा, "मैं लंबे समय से व्यापार समझौते का इंतजार कर रहा था। मैं इसे पक्का सेंटिमेंट बूस्टर कहूंगा। यह एक बड़ी ट्रेड डील है। यह साफ तौर पर इरादा दिखाता है: अमेरिका आपके साथ है, ब्रिटेन आपके साथ है, और ईयू आपके साथ है। यह ट्रेड डील बेशक एक पॉजिटिव डेवलपमेंट है। मैं बस इतना कहूंगा कि यह एक शुरुआत है। जैसे हमने ईयू के साथ समझौते किए हैं, वैसे ही अब हमने अमेरिका के साथ भी दरवाजे खोल दिए हैं। हमारे जितने ज्यादा द्विपक्षीय व्यापार समझौते होंगे, यह इसमें शामिल हर देश के लिए उतना ही सकारात्मक होगा। व्यापार समझौते दोनों तरफ के लिए फायदेमंद होते हैं; यह हमेशा जीत की स्थिति होती है। व्यापार समझौते या एंगेजमेंट की गैर-मौजूदगी में चुनौतियां आती हैं।"

--आईएएनएस

केके/एएस