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भागलपुर के नाथनगर अस्पताल में लापरवाही का आरोप, अंगूठे की चोट पर घुटने का एक्स-रे लिखने का मामला

 

बिहार के भागलपुर जिले के नाथनगर रेफरल अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक मरीज ने डॉक्टर पर गंभीर लापरवाही और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

मरीज के अनुसार, वह घायल अंगूठे के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा था। जांच के दौरान डॉक्टर ने उसके अंगूठे की चोट को देखने के बजाय घुटने का एक्स-रे लिख दिया। जब मरीज को इस गलती का एहसास हुआ और वह पर्ची में सुधार कराने के लिए दोबारा डॉक्टर के पास पहुंचा, तो उसे राहत मिलने के बजाय कथित तौर पर अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ा।

पीड़ित का आरोप है कि डॉक्टर ने अपनी गलती मानने के बजाय उसे ही फटकार लगाई और ठीक से बात नहीं की। इस घटना के बाद मरीज और उसके परिजनों में आक्रोश फैल गया। उनका कहना है कि अगर समय रहते गलती पकड़ में नहीं आती, तो गलत जांच के कारण इलाज में देरी हो सकती थी और स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए तनाव का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में पहले से ही संसाधनों की कमी है, ऐसे में इस तरह की लापरवाही मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

वहीं, अस्पताल प्रबंधन की ओर से मामले की जांच की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद पूरे घटनाक्रम की जांच की जाएगी और यदि डॉक्टर की गलती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल मरीजों के भरोसे को कमजोर करती हैं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की साख पर भी सवाल खड़े करती हैं। मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार और सही उपचार सुनिश्चित करना डॉक्टरों की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।

फिलहाल, इस मामले को लेकर जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन क्या कदम उठाता है। मरीज और उसके परिजन न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।

बिहार के भागलपुर जिले के नाथनगर रेफरल अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक मरीज ने डॉक्टर पर गंभीर लापरवाही और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

मरीज के अनुसार, वह घायल अंगूठे के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा था। जांच के दौरान डॉक्टर ने उसके अंगूठे की चोट को देखने के बजाय घुटने का एक्स-रे लिख दिया। जब मरीज को इस गलती का एहसास हुआ और वह पर्ची में सुधार कराने के लिए दोबारा डॉक्टर के पास पहुंचा, तो उसे राहत मिलने के बजाय कथित तौर पर अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ा।

पीड़ित का आरोप है कि डॉक्टर ने अपनी गलती मानने के बजाय उसे ही फटकार लगाई और ठीक से बात नहीं की। इस घटना के बाद मरीज और उसके परिजनों में आक्रोश फैल गया। उनका कहना है कि अगर समय रहते गलती पकड़ में नहीं आती, तो गलत जांच के कारण इलाज में देरी हो सकती थी और स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए तनाव का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में पहले से ही संसाधनों की कमी है, ऐसे में इस तरह की लापरवाही मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

वहीं, अस्पताल प्रबंधन की ओर से मामले की जांच की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद पूरे घटनाक्रम की जांच की जाएगी और यदि डॉक्टर की गलती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल मरीजों के भरोसे को कमजोर करती हैं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की साख पर भी सवाल खड़े करती हैं। मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार और सही उपचार सुनिश्चित करना डॉक्टरों की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।

फिलहाल, इस मामले को लेकर जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन क्या कदम उठाता है। मरीज और उसके परिजन न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।