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​​​​​​सरकारी कर्मचारियों के लिए अलर्ट: ऑन-ड्यूटी रील बनाई तो खैर नहीं! जल्द लागू होंगी सख्त गाइडलाइंस

 

आज के दौर में सोशल मीडिया और रील्स का क्रेज आम लोगों से लेकर सरकारी कर्मचारियों तक पहुंच चुका है। कई अधिकारी और कर्मचारी Instagram, YouTube, Facebook और X जैसे प्लेटफॉर्म पर एक्टिव हैं। कुछ कर्मचारी निजी राय साझा करते हैं, जबकि कई अपने YouTube चैनल और सोशल मीडिया प्रोफाइल के जरिए कंटेंट भी बनाते हैं।

अब केंद्र सरकार सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर एक नया Social Media Code of Conduct लाने की तैयारी कर रही है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला उच्च स्तर तक पहुंच चुका है। हाल ही में सेक्रेटरीज के साथ हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ अधिकारियों से इस तरह के नियम तैयार करने के विचार पर चर्चा करने को कहा।

सभी केंद्रीय कर्मचारियों पर लागू हो सकता है नियम

सूत्रों के मुताबिक, Instagram, Facebook और X जैसे प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर तैयार होने वाला यह कोड केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों पर लागू किया जा सकता है। इसमें पद या रैंक के आधार पर अलग-अलग नियम होने की संभावना नहीं है।

यानी वरिष्ठ अधिकारी हों या जूनियर कर्मचारी, सभी को सोशल मीडिया से जुड़े एक समान दिशा-निर्देशों का पालन करना पड़ सकता है। हालांकि, नए कोड को कब तक लागू किया जाएगा और इसमें कौन-कौन से सटीक नियम होंगे, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

एक पोर्टल पर मिलेंगी सरकारी सेवाएं

इसी बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय से एक भारत पोर्टल के काम को तेजी से आगे बढ़ाने को भी कहा। प्रस्तावित प्लेटफॉर्म का उद्देश्य नागरिकों को अलग-अलग सरकारी सेवाओं और सुविधाओं की जानकारी एक ही जगह उपलब्ध कराना है।

सोशल मीडिया कोड की जरूरत क्यों महसूस हुई?

सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नए नियमों की जरूरत ऐसे समय महसूस की जा रही है, जब कई अधिकारी सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत और आधिकारिक कंटेंट दोनों साझा कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा सर्विस रूल्स ऐसे समय में बनाए गए थे, जब Instagram Reels, YouTube Shorts और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आज की तरह प्रभावशाली नहीं थे। अलग-अलग विभागों में अपने-अपने सर्विस नियम होने के कारण सोशल मीडिया से जुड़े मामलों में एक समान व्यवस्था का अभाव भी दिखाई देता है।

पुराने नियमों में रील्स और YouTube का स्पष्ट जिक्र नहीं

Compliance Advisory से जुड़े विशेषज्ञ मुनाब अली बेक के मुताबिक, फिलहाल सरकारी कर्मचारियों की सोशल मीडिया गतिविधियां मुख्य रूप से उनके सामान्य सर्विस रूल्स के दायरे में आती हैं। इन पुराने नियमों में सोशल मीडिया के आधुनिक फॉर्मेट जैसे Reels, Shorts और Instagram Stories को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं।

उन्होंने एक पुराने मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि 2017 में एक BSF जवान का वीडियो सामने आया था, जिसमें उसने खराब गुणवत्ता के खाने को लेकर शिकायत की थी। उस समय मौजूदा सर्विस रूल्स के आधार पर कार्रवाई की गई थी।

नए कोड में क्या-क्या हो सकता है?

प्रस्तावित Social Media Code of Conduct में यह स्पष्ट किया जा सकता है कि सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट कर सकते हैं और क्या नहीं। इसके अलावा गलत आचरण माने जाने वाले मामलों और संभावित कार्रवाई या सजा से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए जा सकते हैं।

खास तौर पर अधिकारियों द्वारा निजी सोशल मीडिया प्रोफाइल और आधिकारिक काम से जुड़े कंटेंट के बीच अंतर बनाए रखने पर जोर दिया जा सकता है।

IAS-IPS अधिकारियों की सोशल मीडिया मौजूदगी भी चर्चा में

पिछले कुछ समय में IAS और IPS अधिकारियों समेत कई सरकारी अधिकारियों की सोशल मीडिया मौजूदगी बढ़ी है। कई अधिकारी YouTube चैनल और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए जनता से जुड़ रहे हैं और अपने काम से संबंधित जानकारी साझा कर रहे हैं।

ऐसे में सरकार के सामने चुनौती यह है कि कर्मचारियों की सोशल मीडिया गतिविधियों को नियंत्रित करने के साथ-साथ अभिव्यक्ति और आधिकारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

AI और डीपफेक के दौर में बढ़ी चुनौती

सोशल मीडिया को लेकर सरकार की चिंता सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। AI से बने वीडियो, डीपफेक और भ्रामक डिजिटल कंटेंट के बढ़ते इस्तेमाल के कारण भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए नियमों को लगातार सख्त किया जा रहा है।

ऐसे माहौल में सरकारी कर्मचारियों के लिए अलग सोशल मीडिया कोड लाने का प्रस्ताव डिजिटल प्लेटफॉर्म के बदलते स्वरूप के साथ सरकारी सेवा नियमों को अपडेट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

फिलहाल नए कोड की अंतिम गाइडलाइंस और लागू होने की समय-सीमा का इंतजार है।