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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने शिक्षा सुधार और नीट क्रियान्वयन में खामियों पर जताई चिंता, कार्रवाई की मांग

 

नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक के बाद प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर संगठन का पक्ष रखा।

उन्होंने बताया कि यह बैठक 29 से 31 मई के बीच ओडिशा के भुवनेश्वर में संपन्न हुई, जिसमें देशभर से आए छात्र प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इससे पहले 27 मई को केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक हुई थी, जिसमें लगभग सौ से अधिक प्रमुख कार्यकर्ता शामिल हुए थे।

प्रेस वार्ता की शुरुआत में डॉ. वीरेंद्र सोलंकी ने दिल्ली में हाल ही में हुए एक अग्निकांड का जिक्र किया, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। उन्होंने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं बेहद दुखद हैं और प्रशासन को इनकी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। कई बार सुरक्षा व्यवस्था में खामियों और लापरवाही के कारण ऐसे हादसे सामने आते हैं, जिन्हें रोका जा सकता है।

इसके बाद उन्होंने विद्यार्थी परिषद की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में शिक्षा, समाज, महिला सुरक्षा, वैश्विक परिस्थितियों और नक्सलवाद से मुक्त भारत जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में देशभर से लगभग 450 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रदेश स्तर के पदाधिकारी, विश्वविद्यालय प्रतिनिधि और छात्र नेता शामिल थे।

डॉ. सोलंकी ने बताया कि भुवनेश्वर में 28 मई को नागरिक अभिनंदन कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया था, जिसमें शहर के प्रबुद्ध नागरिक, शिक्षाविद और विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में विद्यार्थी परिषद को व्यक्तित्व निर्माण से राष्ट्र निर्माण की दिशा में कार्य करने वाला एक महत्वपूर्ण छात्र संगठन बताया। 29 मई से शुरू हुई राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की बैठक में देश की वर्तमान सामाजिक और शैक्षिक परिस्थितियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसमें शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता, महिलाओं से जुड़े मुद्दे, वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति जैसे विषय शामिल थे।

डॉ. सोलंकी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई सुधारात्मक कदमों की आवश्यकता है, लेकिन कई जगह इन सुधारों के क्रियान्वयन में खामियां देखने को मिल रही हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नीट जैसी राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को समान अवसर और एकरूपता के लिए लागू किया गया था, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कई तरह की समस्याएं सामने आई हैं। ऐसी गड़बड़ियों की गहन जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विद्यार्थी परिषद लगातार देशभर के छात्रों के हितों और शिक्षा सुधार के लिए कार्य कर रही है और भविष्य में भी संगठन इस दिशा में अपनी भूमिका को और मजबूत करेगा।

--आईएएनएस

एसएचके/एबीएम