एयरफोर्स के पायलट तैयार, बस तेजस मार्क 1ए जेट का इंतजार, कइयों की ट्रेनिंग हो चुकी है पूरी
नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय वायुसेना को तेजस मार्क 1ए की डिलीवरी पहले से ही लेट है, अभी तक एक भी एयरक्राफ्ट एयरफोर्स को डिलीवर नहीं हो सका है, लेकिन इस देरी के बावजूद भारतीय वायुसेना अपनी तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। तेजस मार्क 1ए जब आएंगे, तब आएंगे, लेकिन उन्हें उड़ाने वाले पायलट अभी से तैयार हैं। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, तेजस मार्क 1ए की फ्लाइंग के लिए पहले बैच के कई पायलटों की ट्रेनिंग भी पूरी हो चुकी है और कई की जारी है। फिलहाल, यह ट्रेनिंग पहले से मौजूद तेजस मार्क 1 पर ही चल रही है।
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेनिंग एक सुचारू प्रक्रिया है। पहले से ही भारतीय वायुसेना के पास तेजस मार्क 1 के दो स्क्वाड्रन हैं। एक सुलूर और दूसरा नाल एयरबेस पर स्थित है। इन दोनों एयरबेस पर ही ट्रेनिंग जारी है। इसके अलावा, सिम्युलेटर पर भी इनकी ट्रेनिंग जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, भविष्य में मिलने वाले तेजस मार्क 1ए एयरक्राफ्ट को कमांड करने के लिए तेजस मार्क 1 के अधिकारी ही हो सकते हैं। तेजस मार्क 1ए, तेजस के पहले के वर्जन से तकनीकी तौर पर थोड़ा अलग है, इसलिए छोटा-सा सिलेबस पूरा करके मौजूदा तेजस मार्क 1 उड़ा रहे पायलट भी तेजस मार्क 1ए में उड़ान भर सकते हैं।
तेजस मार्क 1ए से जो पहला स्क्वाड्रन स्थापित होगा, वह पिछले साल सेवा से फेज आउट हुए मिग-21 बाइसन के आखिरी दो स्क्वाड्रनों में से एक होगा। मिग-21 बाइसन के नंबर 3 स्क्वाड्रन 'कोबरा' को नए तेजस मिलेंगे। नंबर 3 स्क्वाड्रन का इतिहास काफी रोचक है। पहले नंबर 3 स्क्वाड्रन मिग-21 बिस का था। जब मिग-21 बिस को बाइसन में अपग्रेड किया गया तो पहला अपग्रेड भी इसी नंबर 3 स्क्वाड्रन में आया। अब तेजस के एडवांस और अपग्रेडेड वर्जन एलसीए मार्क 1ए भी इसी स्क्वाड्रन में आएंगे।
26 सितंबर 2025 का दिन भारतीय वायुसेना के लिए ऐतिहासिक बन गया था, जब 60 साल की सेवा के बाद मिग-21 हमेशा के लिए रिटायर हो गया। मिग-21 की आखिरी स्क्वाड्रन को उड़ाने वाले पायलट अब ब्रैंड-न्यू स्वदेशी फाइटर जेट तेजस मार्क 1ए उड़ाएंगे। मिग-21 की जगह तेजस मार्क 1ए को लेनी है। चंडीगढ़ में मिग-21 की आखिरी उड़ान के दौरान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के साथ नंबर 23 स्क्वाड्रन 'पैंथर्स' की कमांडिंग ऑफिसर, स्क्वाड्रन लीडर प्रिया शर्मा और अन्य पायलट शामिल थे। मिग-21 पायलट स्क्वाड्रन लीडर प्रिया शर्मा अब आने वाले समय में तेजस मार्क 1ए में उड़ान भरती नजर आएंगी।
अगर किसी पायलट को एक एयरक्राफ्ट से दूसरे एयरक्राफ्ट या फिर दूसरी स्ट्रीम में जाना हो तो उसे भी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है। सामान्यतः पायलट अपनी मर्जी से अपनी स्ट्रीम नहीं बदल सकते। फ्लाइंग स्ट्रीम में फाइटर, फिक्स्ड-विंग ट्रांसपोर्ट और हेलिकॉप्टर शामिल हैं। फाइटर पायलट ट्रांसपोर्ट या हेलिकॉप्टर स्ट्रीम में जा सकते हैं। मिग-21 के रिटायर होने के कारण इनके पास स्ट्रीम बदलने का वैध कारण है। इसके अलावा वायुसेना के पायलट ट्रेनिंग प्रोग्राम में अलग-अलग फाइटर जेट स्पेशलाइजेशन के विकल्प होते हैं। मिग-21 पायलटों को दूसरे फाइटर एयरक्राफ्ट पर ऑप्ट करने के लिए 3 से 6 महीने की ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है, क्योंकि हर एयरक्राफ्ट अलग होता है।
--आईएएनएस
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