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सर्दियां शुरू होने से पहले ही जहरीली हुई हवा, 254 में से 131 शहरों का AQI खराब; दिल्ली-NCR में GRAP-1 लागू

 

देश में सर्दियों ने अभी पूरी तरह दस्तक भी नहीं दी है, लेकिन कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर चिंता बढ़ाने लगा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के 22 अक्टूबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, निगरानी वाले 254 शहरों में से 131 शहरों की हवा मध्यम से लेकर बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई। दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने के बाद GRAP का पहला चरण लागू कर दिया गया है। वहीं, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में वायु गुणवत्ता की स्थिति और भी चिंताजनक बनी हुई है।ऐसे में सवाल उठता है कि सर्दियों से पहले ही हवा इतनी प्रदूषित क्यों हो रही है? ठंड बढ़ने पर हालात कितने बिगड़ सकते हैं और इसका लोगों की सेहत पर क्या असर पड़ेगा?

254 शहरों में से 131 की हवा मध्यम से बेहद खराब

CPCB के 22 अक्टूबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश के 254 निगरानी वाले शहरों में वायु गुणवत्ता की स्थिति इस प्रकार रही:

  • 25 शहर: अच्छी हवा, AQI 0-50

  • 98 शहर: संतोषजनक हवा, AQI 51-100

  • 111 शहर: मध्यम श्रेणी, AQI 101-200

  • 17 शहर: खराब श्रेणी, AQI 201-300

  • 3 शहर: बेहद खराब श्रेणी, AQI 301-400

इन आंकड़ों के मुताबिक, 131 शहरों का AQI 100 से ऊपर रहा। इसका मतलब है कि इन शहरों में वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के लिहाज से चिंता का विषय बन चुका है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।

पंचगांव, बड़ौत और हापुड़ में प्रदूषण का स्तर बेहद खराब

सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की सूची में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के शहर प्रमुख रहे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा के पंचगांव में AQI 378 दर्ज किया गया। वहीं, उत्तर प्रदेश के बड़ौत और हापुड़ में AQI 328 रहा। ये सभी आंकड़े बेहद खराब वायु गुणवत्ता की ओर इशारा करते हैं।

इसी दिन दिल्ली का AQI 223 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। आंकड़ों के अनुसार, कई अन्य शहरों की हवा दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित थी।

इसके विपरीत, मिजोरम की राजधानी आइजोल में AQI 20 दर्ज किया गया, जो अच्छी वायु गुणवत्ता को दर्शाता है।

दिल्ली-NCR में तेजी से बिगड़ी हवा

दिल्ली-NCR में अक्टूबर के दौरान वायु गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का AQI 20 अक्टूबर को 179 था, जो मध्यम श्रेणी में आता है। 21 अक्टूबर की दोपहर तक यह बढ़कर 244 हो गया और खराब श्रेणी में पहुंच गया। 22 अक्टूबर को AQI 223 दर्ज किया गया, लेकिन हवा की गुणवत्ता खराब ही बनी रही।

कुछ निगरानी केंद्रों पर प्रदूषक कणों का स्तर भी काफी अधिक दर्ज किया गया। आनंद विहार में PM10 का स्तर 488 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पंजाबी बाग में PM2.5 का स्तर 305 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर बताया गया।

PM2.5 और PM10 हवा में मौजूद सूक्ष्म कण हैं। PM2.5 के बेहद छोटे कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से सांस संबंधी समस्याओं के साथ हृदय स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हापुड़, बड़ौत, बागपत, मेरठ और नोएडा समेत कई शहरों में भी प्रदूषण का स्तर चिंता बढ़ा रहा है।

दिल्ली-NCR में GRAP-1 क्यों लागू किया गया?

दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP का पहला चरण लागू किया।

GRAP प्रदूषण की गंभीरता के अनुसार लागू किए जाने वाले उपायों की एक व्यवस्था है। इसके तहत धूल नियंत्रण, सड़कों की सफाई, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की निगरानी जैसे कदम उठाए जाते हैं। प्रदूषण बढ़ने पर स्थिति के अनुसार अतिरिक्त पाबंदियां भी लागू की जा सकती हैं।

सर्दियां आने से पहले ही हवा जहरीली क्यों हो रही है?

पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण एक साथ काम करते हैं। इनमें पराली जलाना, वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और मौसम में बदलाव प्रमुख हैं।

1. पराली जलाने से बढ़ता प्रदूषण

पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में धान की कटाई के बाद अक्टूबर और नवंबर के दौरान पराली जलाने की घटनाएं प्रदूषण बढ़ा सकती हैं। हवा की दिशा और गति अनुकूल न होने पर इसका धुआं दिल्ली-NCR तक पहुंच सकता है।

हालांकि, पराली का योगदान हर दिन एक जैसा नहीं रहता। यह मौसम, हवा की दिशा और खेतों में आग लगने की घटनाओं के आधार पर बदलता है।

2. वाहनों से निकलने वाला धुआं

दिल्ली-NCR में वाहनों का उत्सर्जन प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक हवा की गुणवत्ता खराब कर सकते हैं। इसके अलावा ट्रैफिक जाम और सड़कों पर उड़ने वाली धूल भी समस्या को बढ़ाती है।

3. मौसम में बदलाव

मानसून की विदाई के बाद तापमान गिरने और हवा की गति कम होने पर प्रदूषक कण वातावरण में ज्यादा समय तक जमा रह सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में तापमान उलटाव (इन्वर्जन) के कारण प्रदूषक जमीन के करीब फंस जाते हैं। इससे धुंध बढ़ सकती है और हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ सकती है।

4. पटाखे, निर्माण कार्य और कचरा जलाना

त्योहारों के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं स्थानीय प्रदूषण बढ़ा सकता है। इसके अलावा निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल, खुले में कचरा जलाना और औद्योगिक उत्सर्जन भी हवा को प्रदूषित करते हैं।

सर्दियों में हालात और बिगड़ने की आशंका

सर्दियों के दौरान तापमान कम होने, हवा की रफ्तार घटने और प्रदूषकों के जमीन के करीब जमा होने से कई शहरों में प्रदूषण बढ़ सकता है। पराली जलाने, वाहनों के उत्सर्जन और स्थानीय स्रोतों से निकलने वाले प्रदूषण का असर भी एक साथ दिखाई दे सकता है।

हालांकि, प्रदूषण कितना बढ़ेगा, यह मौसम, हवा की दिशा, बारिश और प्रदूषण नियंत्रित करने के उपायों पर निर्भर करेगा। इसलिए आने वाले दिनों की स्थिति का आकलन ताजा AQI और मौसम संबंधी पूर्वानुमान के आधार पर ही किया जा सकता है।

प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?

  • AQI बहुत खराब होने पर बाहर लंबे समय तक व्यायाम करने से बचें।

  • बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

  • जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल करें।

  • आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी या सीने में जकड़न होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

  • घर और आसपास कचरा या पत्तियां जलाने से बचें।