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अहमदाबाद : 158 शरणार्थियों को मिली भारतीय नागरिकता, डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने बांटे प्रमाण पत्र

 

अहमदाबाद, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। गुजरात के अहमदाबाद में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मंगलवार को उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 158 शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता के प्रमाण पत्र बांटे। नागरिकता मिलने के बाद शरणार्थी परिवारों के चेहरों पर खुशी साफ देखी गई।

इस मौके पर डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने कहा, "आपके दिलों में आप हमेशा से भारतीय थे, लेकिन आज से आप आधिकारिक तौर पर भी भारतीय बन गए हैं। पाकिस्तानी पासपोर्ट रखने का जो धब्बा था, जो तकलीफ देता था, अब आप गर्व से भारतीय पासपोर्ट ले सकेंगे।"

पत्रकारों से बात करते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि पाकिस्तान में हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध परिवारों के साथ जिस तरह का व्यवहार होता है और उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है, उसी वजह से कुछ परिवार विस्थापित होकर भारत आए थे। ऐसे 158 परिवारों को आज भारतीय नागरिकता दी गई है।

उन्होंने बताया कि सभी परिवारों ने बताया कि उनके साथ पाकिस्तान में किस तरह के जुल्म हो रहे थे। परिवारों ने भारत सरकार का आभार जताया। बड़ी संख्या में डॉक्टरों ने भी बताया कि वहां हिंदुओं के साथ किस तरह का जुल्म और बुरा बर्ताव किया जाता था।

हर्ष संघवी ने कहा कि एक बुजुर्ग परिवार ने बताया कि उनके लिए तो आज का दिन ही दीपावली का दिन है। उन्हें नया जीवन मिला है। उन्होंने सभी परिवारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, "मुस्कुराइए कि अब आप भारत के नागरिक हैं।"

नागरिकता मिलने के बाद शरणार्थियों ने अपनी खुशी जाहिर की। शरणार्थी रायचंद ने आईएएनएस से कहा, "मैं 2017 में पाकिस्तान से इंडिया आया था। वहां हमें बहुत सारी समस्याएं थीं। हमें वहां डर लगता था, इसलिए हम भारत आ गए। भारत सरकार हमें हर चीज की सुविधा देती है। मैं आज इतना खुश हूं कि आज का यह दिन मेरे लिए नई दीपावली है। मेरा पूरा परिवार भारत आ गया है।"

शरणार्थी शारदा ने कहा, "मैं अहमदाबाद में रहती हूं। पाकिस्तान में औरतों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यहां भारत में बहुत आजादी है। इसलिए हम यहां आकर बहुत खुश हैं।"

शरणार्थी विस्नी ने बताया, "पाकिस्तान में मैंने बहुत मुसीबतें देखी थीं। यहां आने के बाद जो आजादी मिली है, उससे मैं बहुत खुश हूं कि मुझे आज भारत की नागरिकता मिल गई है। मैं यहां पूरे परिवार के साथ आ गई हूं।"

शरणार्थी कुंदनिका ने कहा, "मुझे 15 सालों के बाद भारत की नागरिकता मिली है। जब मैं अपने परिवार के साथ भारत आई थी, तब 4 साल की थी। यहां मैं बहुत सुरक्षित महसूस कर रही हूं।"

--आईएएनएस

वीकेयू/एएस